एक महात्मा हमारे जीवन में उतरा

25 Jun एक महात्मा हमारे जीवन में उतरा

चुन चुन के खुशियाँ
उसकी झोली में भर
घूंगरू से प्यार बेपनाह कर
राजू ने रोज़ी के
दिल के आँगन में
ऐसा गुलिस्तान बसाया
की फूनों की खुशबूं से
रोजी का पल पल महकाया
दोनों कि दुनीया
गजब की सज चुकी थी
राजू के माथे पे
रोजी के पैरो की धुल थी
दुनिया कह रही थी
रोजी भी ओरों के कहने में आ
राजू को खुद से दूर कर चुकी थी
हाँ वो रोयी थी
पछताई भी थी
शायद यही राजू के प्यार की
गहरायी थी
वहाँ राजू तो खुद को बदल चुका था
उस खुदा का उसे एहसास
जो हो चला था
लोगों के विश्वास से
उसे भी आस का साथ हो चला था
एक महात्मा हमारे जीवन में उतरा
जिसने कहा था हम ही हैं
उस खुदा का कतरा कतरा

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