जो रुक जाता

25 Jun जो रुक जाता

माना शुरुवात में
हम हम ना थे
पर हालातों ने हमको
बदल के रख दिया
और फिर कुछ ऐसा हमने किया
की हर किसी की नज़र में
जैसे पल भर में सवेरा हो गया
जो रुक जाता
फकसी की बातों में आ जाता
तो कैसे अपनी मंजिल से
इस जहां का नज़ारा कर पाता
काश हर सपना मेरा तुम्हारा
बन उस गगन मे टिमटिमाता

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