आओ बीती बातों को

22 Jun आओ बीती बातों को

मिठास जो मेरी बोली में होती
मेरे और उसके कदमो के बीच
में इतनी दूरी ना होती
जब जब अपनी पलके उठाती
मुझे अपने सामने पाती
बस इतना सा ख्वाब ही तो वो
दिन भर अपनी आँखे में है सजाती
तो फिक्र क्यूँ औरों की करें
जब जिक्र हम तुम
आपस में कया करें
आओ बीती बातों को
हम रफा दफा करें

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