एक दूजे को आदाब

25 Jun एक दूजे को आदाब

कुछ मुलाकातें ऐसी होती हैं
वो आते हैं
टकराते हैं
फिर गुमसुम से हो जाते हैं
खुद को रोक नहीं हैं पाते
उसी को ढूढ़ते है आते जाते
पलटते रहते है किताब
देखते हैं जागती आँखों से ख्वाब
हो जाते हैं एक दूजे से मिलने को बेताब
कुछ हैं जो प्यार में
कह रहे एक दूजे को आदाब

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