इश्क की इन गलियों में

22 Jun इश्क की इन गलियों में

जिन गलियों से गुजरने की
ख्वाहिश लिए चले जा रहे थे
जिस दुपट्टे के सरकने से
हम मचले जा रहे थे
आज उन्ही गलियों में
उसी दुपट्टे के सगं
उड़ने की चाहत
मेरे दिल में यूँ घर कर गयी
इश्क की इन गमलयों में जब
तू मेरी आँखे नम कर गयी
कल रात तमु चुपके से
हमें दुआ सलाम कर गयी

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