X

इबादत करें

इबादत करें

शुकराना करे

आरज़ू करें

बस तुम्हारी

चाहत करें

शराफत करें

खिदमत में तुम्हारी

हम सिमट रहे हैं

आरजूओ में तुम्हारी

समझो जरा कुदरत के इशारे

हम हैं बस तुम्हारे सहारे

जन्नत मिली हैं मुझे

कभी बैठा था मैं सुनसान किनारे

कभी ना भूलेगे हम

ये एहसान तुम्हारे

This post was last modified on April 5, 2019 8:32 am