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मैं तुमको चाह कर भी

मैं तुमको चाह कर भी

चाह ना सका

मैं तुमको पा कर भी

पा न सका

अब अंधेरे में तुम्हारी

जुस्तजू की

क्यूँ फिर हमने तुम्हारी आबरू

की कद्र ना की

सब्र कैसे करे की

हम सदमे में हैं

किससे कहें

बेहतर होता की

वक्त पे काबू रख पाते

हम उन पलो के

दाग धो पाते

काश तुम जब भी कही जाती

हम तुम्हारे साथ हो जाते

This post was last modified on August 12, 2017 1:35 am