Love Shayari

Doston swagat hai aap sabhi ka shayari ki dukan me jahaan hum aapse share kar rahe hain 100 se bhi zyada love shayari . Aasha karte hain aapko yeh sabhi shayari pasand aayegi . Shayari yahan aapko kaisi lagi yeh hame in aap jarur bataiyega .

love shayari

1)महसूस कुछ यूँ किया है
पी रहा हूँ अमृत
जिसका जिक्र हमने आज
पहली ही दफा किया है
अब जैसे हर पल को
खुल के जिया है
किस्सा कुछ ऐसा ही है हमारा
हिस्सा हो चुके हैं हम तुम्हारा
बड़ी खुबसूरत है हमारी जहाँआरा

2)तसवीरें बोल पड़ेंगी
तकदीरें जाग उठेंगी
बजने लगेंगी शहनईयां
लुट जाएूँगी तनहाइयां
जब जब नज़रें तुम्हारी
हम से मुलाकातें करेंगी
आदतें हमारी तुम पहचानती हो
दूरियां हैं क्यूँ यह भी जानती हो
और क्या चाहे खुद से
जब तुम हमें अपना मानती हो

3)संभाला तुम्ही ने अपने आँचल में
मेरी हर हार के बाद
आयी तेरे होठों पे मुस्कान
मेरे सूखे प्याले में भर जाए
खुशियाँ कुछ ऐसे थे मेरे अरमान
हाँ में था नादान
मुझे इल्म ही न था
तू ही है मेरी सच्ची कदरदान
संभाला तुम्ही ने अपने आँचल में
बाँधा मेरी हर बूँद को बरसाती बादल में
इस दफा कुछ ऐसा बरसूँगा
हारू या जीतू मैं बस झूमूँगा

14 Jun

लिखने मे भी आनन्द कहा आता है

आप कि खातिर
आप कि कसम
कहने को हम जी रहे है
पर तुमसे मिलने कि
आस मे तड़प से रहे है
वक़्त वो पल भर मे गुजर जाता है
जिस पल मे तुम्हारा साथ घुल जाता है
और सुनो रानी तुम पास ना हो तो
लिखने मे भी आनन्द कहा आता है

14 Jun

तेरे कदमो पे करते हैं निसार

मेरी ख्वाहिसों को रंगीनियत का एहसास दिला रही
मेरे ख़्वाबों में तुम इस कदर छा रही
जन्नत की मन्नत अब हम क्यूँ करें
आशियाने में अपने तेरी जुल्फों में क्यूँ न डूबा करें
इतनी हसीन हो और कहती हैं तारीफ़ भी न कया करें
जिन्दगी को गुलाबों से महका के
मुझे अपना बनाके
तेरे एहसान हम कैसे चुकाए
तेरा एहसास हम कैसे भुलाएं
जीवन की रफ़्तार
रुक – रुक कर रही इश्तिहार
तेरे किमो पे करते हैं निसार
यह दुनिया यह जहां यह बहार

14 Jun

अब हार पे मुस्कुराना भी आ जायेगा

अब हार पे मुस्कुराना भी आ जायेगा
तेरे प्यार में रहे तो खिलखिलाना भी आ जायेगा
मुश्किलो से भला हम क्यु डरें
तेरा साथ मिला है जब से
आँखोंमें नए नए सपने से हैं भरे
आसान हो गया है अब जीना
वो वक़्त पीछे छूटा
जब रखना होता था होठों को सीना
अब गुनगुनाने में दिल बहल जाता है
तुम पास हो ना हो
जिक्र तुम्हार खुद ही से हो जाता है
तेरे आने की दस्तक सुनते ही
दिन कब कैसे
इंतज़ार में तुम्हारे
हाथों से फिसल सा जाता है
अब तो तुमसे मिलके ही
यह दिल सुकून को पाता है
कई दफा तनहा रातों में
तुम्हारी हसरत में
यह मन मचल भी जाता है
अब तो बहती हवाओं की धुन में भी
नाम तुम्हारा ही सुनने को
जी चाहता है

13 Jun

रिश्ते के मायने

रिश्तेनाते मिटटी में मिल जाए
भाई – भाई के काम न आये
जल्लादों के हाथों हो देश की सत्ता
न मिल फूल न पत्ता
समझने जरुरी हैं ,कुदरत के कायदे
मज़ा जिन्दगी में है ,
जब समझे रिश्तो के मायने

13 Jun

क्यों तूने माँ की अस्ति गंगा में ना बहाई ?

कहानी बड़ी अजीब सी लिखी नसीब की ,
जिस धरा की खाते थे रोटी |
उसी पे हुयी तेरी नीयत खोटी |
जिस माँ के हाथों में था चूरमा तेरे वास्ते|
उस माँ को मिली सुखी रोटी तेरे रास्ते |
उसके प्यार को भूल कोई बात नहीं |
उसकी हर इक बात को भूल कोई बात नहीं |
तुझे उसकी जरा भी याद न आई |
क्यों तूने माँ की अस्ति गंगा में ना बहाई ?

13 Jun

माँ जो तू न होती….

आँखे बंद जो करता तो चेहरा तेरा दिखता|
सपनो के गुलिस्तान में नया फूल तो खिलता|
जिन्दगी को रोशन करता धुप में जब घिरता |
टप टप पानी पसीना बना
अपने दोषों को चीरता |
हिम्मत और लगन के साथ
खुद को तनहा ही रखता |
विश्वास की डोर के सहारे डर को दूर भगाता |
मेरी माँ जो तू न होती तो
मिटटी को सोना कैसे बनाता |

13 Jun

हम कौन है ये जान पाए थे

में मेरा नहीं तू तेरा नहीं |
इस जीवन में कोई अकेला नहीं |
अपनी सोच पे रखकर विश्वास,
जो खुद पर करते ऐतबार ,
तनहा नहीं होते आज |
अपने सपनों को पीछे छोड़ आये थे |
माँ के समझाने से समझ पाए थे |
हम कौन है ये जान पाए थे |

13 Jun

PUSHPA I HATE TEARS

कहना कुछ भी हम तो जी रहे हैं हर पल |
जानता कुछ नहीं स्वाभाव से थ वो सरल |
प्यार कब हमारे जीवन का हिस्सा हो गया |
उनका हर किस्सा मशहूर हो गया |
चन्द पलों म वो दास्तान यूँ बयान कर जाते थे |
हर तरफ खिलखिलाते चेहरे नज़र आते थे |
खुद पर जिसने ऐतबार ककया |
उसे खुदा ने कभी ना नज़रअंदाज़ किया |
काका की कहानी हमें तुम्हे सुनानी थी |
पहले सुपरस्टार की बात दोहरानी थी |
PUSHPA I HATE TEARS .
KAKA YOU ARE OUR DEAREST DEAR .

13 Jun

एक पैगाम है…….

बेहतरी को तेरी एक पैगाम है |
बरसों बाद तुम्हे देख हम हैरान हैं |
तुम वो  नहीं जो किसी के रोके रुकते ,
तेरी हस्ती तो कुछ और ही थी |
तुम वो नहीं जो चलते – चलते थकते ,
तेरी आँखों में नमी तो ना थी |
किस बात पे खुद ही से हुआ ख़फ़ा |
मिलने आये तुमसे हम कई दफ़ा |
हर पल सुखों के समन्दर नहीं होते |
छोटी -छोटी बातों पे ऐ दिल नहीं रोते |
ऐ जागती आँखों से सोने वाले |
सपने हक़ीक़त से रूबरू यूँहीं नहीं होते |

13 Jun

आओ इंसानियत सिख ले

किस्मत भी क्या – क्या खेल  खिला रही |
रोते हुए को हंसा रही |
कहीं जख्मों पर मरहम लगा रही I
अन्जाने में की गलती तो शायद खुदा भी माफ़ कर दे |
पर जब कोई खुद ही को खुदा समझे ,
तो नाटक के बीच ही में गिर जाते हैं परदे |
एक छोटी सी भूल बरसों पीछे ले जाती है |
मैं की आग में जान छटपटाती है |
हम क्यूँ न इस मैं को जीत ले |
इंसान हैं हम , आओ इंसानियत सींख ले |