वक़्त कुछ ऐसा बदला

17 Jun वक़्त कुछ ऐसा बदला

तुझसे मिलने में वो बात है
की भीगे मेरे ज़ज्बात हैं
एक ऐसा मुकाम जो
तेरे साथ साथ
हम पा गए
साथ मिला तेरा
और हम खुद को
खुद ही से हार गए
एक वक़्त था जब
खुदा से मिलने की खातिर
राहो को अपनी हम निहार रहे थे
वक़्त कुछ ऐसा बदला
हवा ने रूह कुछ यूँ पलटा की
हम जुल्फे तुम्हारी संवारने में
वक़्त अपना गुजार रहे थे

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