Shayari ki Dukan

12 Aug

जब भी कोई ख्वाब पूरा हुआ

जब भी कोई ख्वाब पूरा हुआ

मेरा मन जैसे सुनहरा-सुनहरा हुआ

तुमसे जब जब मिलना हुआ

जहन में मेरे एक सवाल पुख्ता हुआ

की इतना हसीना ख्वाब

मेरा न जाने कैसे हुआ

किस तरह न जाने

मेरा मुकद्दर मुझपे मेहरबान हुआ

कैसे मेरे नसीब में फूलो का गुलिस्ता हुआ

कौन से कर्म की

या मेर धरम की

न कहना अब की मैनें लिखने में शर्म की

तुम मिली मुझे

क्यूकि खुदा ने मुझ पर रहमत की

11 Aug

सपनों की दुनिया

सपनों की दुनिया

में हकीकत के फ़साने

बंद आँखों के सपने

होते हैं लुभावने

दुनिया क्या जाने

मेरे सपनों की कीमत

मेरी मोहब्बत ही है

मेरी ज़ीनत

क्या कह रहा हूँ

क्या सोचा रहा हूँ

हकीकत से

दो दो हाथ कर रहा हूँ

एक गैर की चाहत में

दिन रात एक कर रहा हूँ

उस खुदा की रहमत हो

बस यही इन्तजार कर रहा हूँ

बस कुछ करने की ख्वाहिश थी

पर अपनों की खातिर

आज उनके ख्वाबो को जी रहा हूँ

10 Aug

मैं तुमको चाह कर भी

मैं तुमको चाह कर भी

चाह ना सका

मैं तुमको पा कर भी

पा न सका

अब अंधेरे में तुम्हारी

जुस्तजू की

क्यूँ फिर हमने तुम्हारी आबरू

की कद्र ना की

सब्र कैसे करे की

हम सदमे में हैं

किससे कहें

बेहतर होता की

वक्त पे काबू रख पाते

हम उन पलो के

दाग धो पाते

काश तुम जब भी कही जाती

हम तुम्हारे साथ हो जाते

09 Aug

प्यार तुम्हारा पाया

प्यार तुम्हारा पाया

रोशन हुआ मेरा साया

रात हो या दोपहर

बरसा रही हो

अपने हुस्न का कहर

जिस्म में लगी है आग

तुम्हे छूने भर से

तुम्हे पाने की ख्वाहिश रखते हैं

न जाने कब से

प्यास के अंगारे को और न भडकाओ

तडप रहा हूँ में

मेरी यह आग बुझाओ

आओ जरा पास हमारे

और प्यार की अलख जगाओ

love shayari
08 Aug

आज फिर सवेरा हुआ

आज फिर सवेरा हुआ

लेकिन सुनहरा हुआ

आगोश में तुम्हारे गुजारी थी

जो कल की रात

काश होता तुम्हारा हमारा

पल पल का साथ

रात हो जाती यूँही लिए

हाथों में हाथ

तुम्हारी साँसो में बस जाएँ हम

ये जिन्दगी यूँही गुजर जाये

तो न रहे कोई गम

चाहत से सराबोर हैं

तुम्हरे प्यार में मदहोश है

बहते झरने के मीठे जल

की मीठास लिए

मोहब्बत में अपने होठो को सिए

कुछ कह रही हैं

तुम्हारी खामोशियाँ

जैसे चाह रही है

थोड़ी और नजदिकिया

07 Aug

प्यार में तुम्हारे दीवाने हुए

प्यार में तुम्हारे दीवाने हुए

इस दुनिया में रहने के काबिल हुए

बातो में तुम्हारी शामिल हुए

जैसे खुदा की खिदमत में हाजिर हुए

फिर क्यूँ कहती हो

हम जालिम हुए

बस कुछ पलो के लिय ही सही

आज हम तुममे शामिल हुए

         प्रेम खत

मेरी प्रिय,

मेरी जानेमन यह कोई इतेफ़ाक नही की हम तुम मिले एक दूजे के हुए| यह सृष्टि की ख्वाहिश थी | हर फुल की गुजारिश थी | जिन्दगी तो दो पल की  भागदौड हैं| बस प्यार से तुन्हारे यह जीवन सराबोर है | लिखने की ख्वाहिश भी तुम ही से, कुछ करने की चाहते भी तुम ही से| जिन्दगी यूँही गुजर जायेगी, तुम्हारी जुल्फों की छांव में |

तुम्हारा प्रियतम

zindagi shayari in hindi font
06 Aug

हम young हैं

जब तलक दिल में उमंग हैं

रस्ते तंग हैं

फीर भी जिंदगी जल-तरंग हैं

जेब कटी पतंग है

फिर भी आनन्द हैं

हम अकेले हैं

फिर भी कोई संग हैं

जाने कौन सी है लहर

पी जातें हैं

कैसे – कैसे कडवे जहर

जिन्दगी बरसाती रहती है

कहर पे कहर

आसान नहीं होती हैं

यह जवानी की डगर

फिर भी सह जाते हैं

कुछ बनने की छह में

निकल पड़ते हैं जो

बस वही young हैं

हर राही हैं अकेला

जिसने थामा जिन्दगी का रेला

यह जिन्दगी उसी के संग है

बस वही young हैं

बस वही young हैं

05 Aug

आशा को तुम्हारी|

आशा को तुम्हारी

तन्नाओ को हमारी

चाहत को तुम्हारी

कोशिशों को हमारी

मंजिलो के दायरे में खुद को यूँ बांध दिया था

क्यूकि अपनों की खातिर ठानी थी कुछ करने की

फिर अपनों ने ही सवाल किये

अपनों ने ही इलजाम दिए

बेहतरी को उनकी मुकाम समझा था

इस बीच उन्होंने हमें न जाने क्या क्या समझा था

कहते हैं जख्म और जहर हम ही से हैं

उन्हें नहीं पता फ़िकर में उनकी हम कब ही से हैं

कुछ साल गुज़र जाने दो

दौर वो भी जल्द आएगा

जब तुम्हारे दिल में भी बस नाम हमार रह जायेगा

बस नाम हमारा रह जाएगा

21 Jul

काश तुम मुझपे विश्वास कर सकती

काश दिल की बातें दिल में न रहती
काश मेरी ख्वाहिशे बन कागज की कश्ती
यूँ ही दरिया में न बहती
काश मेरे दर्द की कसक
सीने में तेरे न चुभती
काश मेरे आँखों की नमी
तेरी आँखों में न उतरती
काश की तुम उस पल को मेरे
आस-पास ही होती
काश मेरी शामें
यूँ तनहा तनहा सी न होती
काश की तुम हालातों को मेरे
यूँ दरकिनार न करती

01 Jul

जिन्दगी में

कुछ ख्वाब अधूरे रह गए|
मौत की ख्वाहिश में
न जाने कितने पल
जीवन से महरूम रह गए|
हाथ कुछ ना आया
और हम मजबूर हो गए|
बेबस समझ खुद को
जाने क्यों दुनिया को
अलविदा कह गए|
मौत कि तलाश में
किसी के प्यार में
हम गुमनाम हो गए|
परछायी से खुद ही की
हम पूछ रहे,
क्यों अब तलक
हमारे साथ है|
जिस कि ख्वाहिश हमने की
वो आज किसी और की
परछायी है|
हमारी गुमनामी
जीवन मे उनके
क्या खुब रंगत लेकर आयी है|