Shayari ki Dukan

22 Jun

मोहब्बत में हूँ

बस करो की
इतना प्यार
मैं कैसे संभालू
एक पल को सोचू
एक पल तुमको निहारूं
और कुछ इसी तरह
दिन रात मैं गुजारूं
तेरे ख्वाबों को पूरा करने की
आस्मां में पतंग सा उड़ने की
कोशिश क्यूँ ना करूं
जब हर पल है रंगीन
तो जज्बातों में क्यूँ ना बहूँ
मोहब्बत में हूँ
भला औरों से क्यूँ ना कहूं

22 Jun

यूँ बेहोशी में ज़िंदगी बसर करेंगे

नशा करेंगे
तबाह करेंगे
जब तक जियेंगे
पल पल मरेंगे
कहते हैं हम ना डरेंगे
और फिर वही कही
किसी गड्ढे में जा गिरेंगे
जिस देश को
मजबूत कंधो की जरुरत हो
मिटटी को सोना बना दें
जिनकी ऐसी फितरत हो
जब वही खुद पर से भरोसा खो देंगें
यूँ बेहोशी में जिन्दगी बसर करेंगे
फिर दुश्मन हमारे
भला हमसे क्यूँ डरेंगे

22 Jun

कुछ ऐसी हमारी रानी है

वो बेहतरीन
एक ऐसी हसीन
जिसकी बातों में शामिल
बस हम है
वो कहती है
कुछ कहो ना
यूँ चुप चुप रहो ना
जुबान पे तुम्हारी
नाम हमारा आता नहीं
दिल को तुम्हारे
हमारे सिवा कोई भाता नहीं
करो ना करो यकीन
कुछ ऐसी हमारी रानी है
है छोटी पर दिलचस्प
हमारी प्रेम कहानी है

22 Jun

और हमने तेरी खातिर

परिंदे आकाश में फिरते
कुछ इस धरती की
पनाह में बसते
सपने रातों के उजाले में हैं निकलते
अपनी एक अलग सी
दुनिया को वो हैं रचते
यहाँ हर किसी ने
अपने एक जहां बसा रखा है
और हमने तेरी खातिर
अपने सपनो को भी सुला रखा है

22 Jun

इज़ाज़त आपकी चाहते हैं

हुजूर कहिए
यूँ चुप तो न रहिए
हमारी तारीफों को ज़रा सी
तवज्जो तो दीजिये
बस इतना सा रहम इस
दीवाने पे कीजिए
इज़ाज़त आपकी चाहते हैं
कुछ लिखने से पहले
बस आपको मुस्कुराते
देखना चाहते हैं
घर से निकलने से पहले

22 Jun

रहती हो हमारी धडकनों में

शरारती हो अंदाज-ए-बयान
और पूछे वो रहते हो कहाँ
बेझिझक पर्दा शर्म का उठाओ
और कहदो ज़रा सूरत तो दिखलाओ
आइना हमारी आँखे बन जाएगी
जब भी तुम बन संवर
झूठ झूठ इतराओगी
जब बिच्देंगे हम तुम
कल कब मिलोगी
यह जरुर बतलाओगी
बेहिसाब बारिश के मौसम में
इन्रधनुष सी खिलखिलाओगी
कया मुझसे ये वािे निभाओगी
रहती हो हमारी धडकनों में
कल तुम सब को बतलाओगी

22 Jun

पत्थर भी सागर में

गहराती दिशाओं की आड़ में
एक हल्की सी लौ
मंद मंद मुस्कुरा रही थी
हर आते जाते को
एक पहेली पूछ रही थी
किसी के समझ ना आये
ऐसी करामात उसने कर दिखाई
भरी बारिश में वो लौ
मशाल बन लहराई
तेज हवाओं की सुलग
उसमे बस चुकी थी
देखने वालों में भी एक नयी
उमंग उमड़ चुकी थी
जीतना जो चाहता है
जीत कर दिखाता है
होंसला हो बुलंद तो
पत्थर भी सागर में
तर जाता है

22 Jun

महसूस हमने किया

सामने तुम्हारा हैं बैठे
कुछ दिल में है
पर यूँ ही कैसे कहते
तुम बेसब्री से इंतज़ार में डूबी हो
तुम हर पल मेरी बातों में गूंजी हो
जानकर हैरान हो रही
झूठ मूठ आँख मूँद सो रही
अपने ख्यालो में
कुछ अनसुलझे सवालों में
जबसे हमें शामिल है किया
नजदिकियाँ होती हैं कया
महसयस हमने किया

22 Jun

थोड़ी सी जोर अजमाइश

मुश्किलों को आने की
चुनौती दे दो
मन की आँखों को
ज़रा सा खोल दो
थोड़ी सी जोर अजमाइश
जब वो करने लगे
हर कोशीश में वो
जब तुम्हे ठगने लगे
मौका उन्हें ज़रा भी ना देना
देखना उन्हें संभलने भी ना देना
कुछ ही देर में वो बिखर जायेंगी
देखते ही देखते वो
तुम्हारे कदमो की धूल खायेंगी
मुश्किलों की चुनौनतयां
यूँ ही आएूँगी जायेंगी
जब तुम जैसे होंगे मुसाफिर
वो अपनी राह भटक जायेंगी

22 Jun

आओ बीती बातों को

मिठास जो मेरी बोली में होती
मेरे और उसके कदमो के बीच
में इतनी दूरी ना होती
जब जब अपनी पलके उठाती
मुझे अपने सामने पाती
बस इतना सा ख्वाब ही तो वो
दिन भर अपनी आँखे में है सजाती
तो फिक्र क्यूँ औरों की करें
जब जिक्र हम तुम
आपस में कया करें
आओ बीती बातों को
हम रफा दफा करें