Shayari ki Dukan

15 Jun

अपने देश की खातिर

वो आ रहा है
जो बदल के रख देगा
हमारी इमारत की नीव
वो मज़बूत कर देगा
होश में आ जाओ की
वक़्त यह भी गुजर जाएगा
हालातो पे नज़र डालो
नहीं तो पैरो के नीचे का
ज़मीन का टुकड़ा भी
बिखरा नज़र आएगा
जागो की रंग आसमान में
अपना ही लहराएगा
तिरंगे के सम्मान में
दुनिया जहां भी
सिर अपना झुकायेगा
किसी के आने का
इंतज़ार ना करना
अपने देश की खातिर
एक नयी पहल
तुम भी करना

15 Jun

चाहत में फिर रहे थे

एक हाथ में कागज़
एक में कलम
ओर दिल में सनम
मन में उठ रही थी तरंग
और सांसों में उमंग
अब दूर नहीं वो गगन
जिसको पाने की थी
सुबह शाम अगन
नज़रों में उनकी
देख रहे थे हम
वो प्यार जिसकी
चाहत में फिर रहे थे
बरसो से हम

15 Jun

तुमने एक पैगाम भेजा

नज़रो ही नज़रो में
सयरज की फकरणों में
चांदनी में लिपटी
सलवटो में
इन्द्रधनुष की रंगीनियों में
तुमने एक पैगाम भेजा
सागर की लहरों से
बरखा की बूंदों से
मेरे हसीन लम्हों ने गुजारिश की
नाज़ुक तुम्हारी हथेलियों
में सजती लकीरों ने
एक ख्वाहिश की
तुमसे मिलने की चाहत में
बादल बन हमने तेरी
चौखट पे बारिश की

15 Jun

आरज़ू बस इतनी की

नजाकत ऐसी की
मुस्कुराहत पे तुम्हारी
हो जाएूँ हम निसार
इश्क में तेरे
हसरत ऐसी की
भूल जाएँ अपना हर अरमान
मोहब्बत में तुम्हारी
आरजू बस इतनी की
बन जाएँ एक बेहतर इंसान

15 Jun

तुम्हारी हस्तियाँ

फिरंगी हैं तुम्हारी
अदाओ की मस्तियाँ
कल कल करती बहती
तुम्हारे नैनो की कश्तियाँ
कुछ और ही हैं
ये बस्तियां
तुम्हारा इश्क
तुम्हारी हस्तियाँ
हमारी महफ़िल में
जहां बसती थी खामोशियाँ
आज यहाँ भी बसती हैं
प्यार की गुस्ताखियाँ

15 Jun

इतिहास के पन्नो पे

मस्ती का माहौल था
पुरा दौर लिखा जा रहा था
इतिहास के पन्नो पे
एक गीत गुनगुना रहा था
मीत उसके सपनो का उसे
अपना बनाना चाह रहा था
एक सीधा साधा सा लड़का
घर को लौट रहा था
नज़रें तभी एक खिड़की पे जा रुकी और
आँखें उनसे कुछ यूँ टकराई
झील प्यार की दो  दिलों ने बहायी
आस दो सतहों के मिलने की
उनके एक दूजे को समझने की
कहते कहते रुक जाने की
चाहत को छुपाने की
तड़पती रातों में खो जाने की
शायद………..
एक नए सवेरे की आहत थी
हाँ फिर से दो दिलों में
एक दूजे की चाहत थी

15 Jun

तेरे चेहरे का नूर मेरी आखों में

तेरे चेहरे का नूर मेरी आँखों में
इस कदर बस चुका है
की पूनम का चाँद जैसे
मेरे जीवन में सज रहा है
होश कब कैसे बेकाबू हो रहे
हम तुम्हारी अदाओं के
कायल हो रहे
जब भी हम तुम्हारे
ख्यालों में खो जाते हैं
वक़्त बेवक़्त तेरी यादों
की उलझनों में बिखर से जाते हैं

15 Jun

लिखने मे भी आनन्द कहाँ आता है

आप कि खातिर
आप कि कसम
कहने को हम जी रहे है
पर तुमसे मिलने कि
आस मे तड़प से रहे है
वक़्त वो पल भर मे गुजर जाता है
जिस पल मे तुम्हारा साथ घुल जाता है
और सुनो रानी तुम पास ना हो तो
लिखने मे भी आनन्द कहा आता है

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15 Jun

तेरे कदमो पे करते हैं निसार

मेरी ख्वाहिशों को रंगीनियत का एहसास दिला रही
मेरे ख़्वाबों में तुम इस कदर छा रही
जन्नत की मन्नत अब हम क्यूँ करें
आशियाने में अपने तेरी जुल्फों में क्यूँ न डूबा करें
इतनी हसीन हो और कहती हैं तारीफ़ भी न कया करें
ज़िंदगी को गुलाबों से महका के
मुझे अपना बनाके
तेरे एहसान हम कैसे चुकाए
तेरा एहसास हम कैसे भुलाएं
जीवन की रफ़्तार
रुक -रुक कर रही इश्तिहार
तेरे कदमो पे करते हैं निसार
यह दुनीया यह जहां यह बहार

15 Jun

कृतिका की ताशु

आज कृतिका को देखने लड़क वाले आ रहे हैं । सभी घर वाले तैयारियों में मशरूफ हैं । सभी के दिल में यही ख्याल है की कृतिका को लड़का पसंद आ जाए । कृतिका से छोटी दो और बहिने है । कृतिका की उम्र भी निकल जा रही है , और छोटी बहने बड़ी हो रही हैं। कृतिका के पिता नहीं हैं , उनका स्वर्गवास लंबी बीमारी के चलते हो गया था । तभी से घर की जिम्मेदारी कृतिका ही संभाल रही है। कृतिका मेहनती थी , तभी तो सरकारी नौकरी का इम्तिहान पास कर वो सरकारी मुलाजिम हो चुकी थी , वही पर एक सहकर्मी रवि से उसकी मुलाकात हुई और मन ही मन वप उसे चाहने लगी , पर दिल की बात जुबान पर आते – आते रुक जाती । वो चाह कर भी अपने दिल की बात रवि से ना कह सकी । वैसे रवि कई दफा बातों – बातों में कृतिका के सामने शादी का प्रस्ताव रख चुका है । जो वो हंसके टाल जाती थी । आज रवि ही के घर वाले कृतिका को देखने आ रहे हैं। कृतिका रवि के घर वालो को बेहद पसंद आई और दोनों परिवारों की रज़ामंदी से उनका रिश्ता भी तय हो गया । रवि और कृतिका अब पति – पत्नी हो चुके थे । दोनों बहुत खुश थे और उनके परिवार भी । शादी के बाद लड़के बदल जाते हैं – यह बात कृतिका की सहेली ने कुछ दिन पहले बातों – बातों में कृतिका से कही थी । जब से कृतिका क शादी रवि से पककी हुई , तभी से उसे यह बात बार – बार याद आ रही थी। शादी के बाद से कृतिका इतनी चुप – चुप सी रहने लगी । रवि सोच में था हमेशा खिलखिलाने वाली कृतिका इतनी चुप – चुप क्यों रहने लगी है। रवि ने कृतिका से जब इस बात करनी चाही , तो कृतिका ने पहले तो कहा कोई बात नहीं , पर जब रवि ने ज़ोर दिया । तो कृतिका ने बताया की कैसे उसे अपनी सहेली की बात बार बार याद आ रही है , जिसक वजह स वो कुछ परेशान सी है । यह बात सुनते ही रवि ने कृतिका को अपनी बाहों में भर लिया । कृतिका ने इतना सुकून न पहले कभी महसूस नहीं किया था , जितना आज रवि की बाहों में महसूस कर रही थी। वो पल था और आज का पल कृतिका की जिन्दगी बहुत प्यार में गुज़र रही थी । शादी के एक साल बाद कृतिका और रवि माता पिता बन चुके थे । ताशु नाम की गुडिया ने उनकी झोली खुशियों से भर दी , उन्हें लग जैसे ज़माने भर म वो सबसे खुशकिस्मत हैं । रवि और कृतिका की जिन्दगी ताशु के इर्द गिर्द घुमने मने लगी । ताशु भी धीरे धीरे बड़ी हो रही थी और संस्कारी भी । सभी कृतिका और रवि की परवरिश की सराहने किया करते । अब जब भी कभी कृतिका को अपनी सहेली की बात याद आती की शादी के बाद लड़के बदल जाते हैं , वो शर्मा जाती और सोचने लगती की अगर रवि ने उस दिन समझदारी ना दिखाई होती तो मैं खुद की जिन्दगी रवि पर शक कर क जाने  किस दोराहे पे ल जाती । कृतिका अब समझ चुकी थी की खुशिया अपने ही हाथों में है , क्योंकि हमारी सोच भी हमारी अपनी ही बनायीं होती है ।

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अपनों को अपनों की
सपनो को सपनो की
अपनों के सपनो को
सपनो में अपनों की
इतनी सी ख्वाहिश को
पूरा करने को
अपनों की इजाजत की
रब की इबादत की
बस एक चाहत की
और एक कदम बढाने की
जरूरत महसूस जो करो
तो सपनो में अपनों को
शामिल किया करो

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