Shayari ki Dukan

15 Jun

साया हूँ मैं

कलमा तेरे इश्क में
लिखने की ख्वाहिश लिए
आनंद में हैं………..
मत पूछो की
हम तेरी चाहत में हैं
जाने कितने सपनो को
सपना बनाया
पर एक तू ही है
जिसे सपनो में भी अपना पाया
साया हूँ में
भूल बैठा हूँ अपनी काया

15 Jun

संभाला तुम्ही ने अपने आँचल में

मेरी हर हार के बाद
आयी तेरे होठों पे मुस्कान
मेरे सूखे प्याले में भर जाए
खुशियाँ कुछ ऐसे थे मेरे अरमान
हाँ में था नादान
मुझे इल्म ही न था
तू ही है मेरी सच्ची कदरदान
संभाला तुम्ही ने अपने आँचल में
बाँधा मेरी हर बूँद को बरसाती बादल में
इस दफा कुछ ऐसा बरसयूँगा
हारू या जीतू मैं बस झुमुँगा

15 Jun

अपने देश की खातिर

वो आ रहा है
जो बदल के रख देगा
हमारी इमारत की नीव
वो मज़बूत कर देगा
होश में आ जाओ की
वक़्त यह भी गुजर जाएगा
हालातो पे नज़र डालो
नहीं तो पैरो के नीचे का
ज़मीन का टुकड़ा भी
बिखरा नज़र आएगा
जागो की रंग आसमान में
अपना ही लहराएगा
तिरंगे के सम्मान में
दुनिया जहां भी
सिर अपना झुकायेगा
किसी के आने का
इंतज़ार ना करना
अपने देश की खातिर
एक नयी पहल
तुम भी करना

15 Jun

चाहत में फिर रहे थे

एक हाथ में कागज़
एक में कलम
ओर दिल में सनम
मन में उठ रही थी तरंग
और सांसों में उमंग
अब दूर नहीं वो गगन
जिसको पाने की थी
सुबह शाम अगन
नज़रों में उनकी
देख रहे थे हम
वो प्यार जिसकी
चाहत में फिर रहे थे
बरसो से हम

15 Jun

तुमने एक पैगाम भेजा

नज़रो ही नज़रो में
सयरज की फकरणों में
चांदनी में लिपटी
सलवटो में
इन्द्रधनुष की रंगीनियों में
तुमने एक पैगाम भेजा
सागर की लहरों से
बरखा की बूंदों से
मेरे हसीन लम्हों ने गुजारिश की
नाज़ुक तुम्हारी हथेलियों
में सजती लकीरों ने
एक ख्वाहिश की
तुमसे मिलने की चाहत में
बादल बन हमने तेरी
चौखट पे बारिश की

15 Jun

आरज़ू बस इतनी की

नजाकत ऐसी की
मुस्कुराहत पे तुम्हारी
हो जाएूँ हम निसार
इश्क में तेरे
हसरत ऐसी की
भूल जाएँ अपना हर अरमान
मोहब्बत में तुम्हारी
आरजू बस इतनी की
बन जाएँ एक बेहतर इंसान

15 Jun

तुम्हारी हस्तियाँ

फिरंगी हैं तुम्हारी
अदाओ की मस्तियाँ
कल कल करती बहती
तुम्हारे नैनो की कश्तियाँ
कुछ और ही हैं
ये बस्तियां
तुम्हारा इश्क
तुम्हारी हस्तियाँ
हमारी महफ़िल में
जहां बसती थी खामोशियाँ
आज यहाँ भी बसती हैं
प्यार की गुस्ताखियाँ

15 Jun

इतिहास के पन्नो पे

मस्ती का माहौल था
पुरा दौर लिखा जा रहा था
इतिहास के पन्नो पे
एक गीत गुनगुना रहा था
मीत उसके सपनो का उसे
अपना बनाना चाह रहा था
एक सीधा साधा सा लड़का
घर को लौट रहा था
नज़रें तभी एक खिड़की पे जा रुकी और
आँखें उनसे कुछ यूँ टकराई
झील प्यार की दो  दिलों ने बहायी
आस दो सतहों के मिलने की
उनके एक दूजे को समझने की
कहते कहते रुक जाने की
चाहत को छुपाने की
तड़पती रातों में खो जाने की
शायद………..
एक नए सवेरे की आहत थी
हाँ फिर से दो दिलों में
एक दूजे की चाहत थी

15 Jun

तेरे चेहरे का नूर मेरी आखों में

तेरे चेहरे का नूर मेरी आँखों में
इस कदर बस चुका है
की पूनम का चाँद जैसे
मेरे जीवन में सज रहा है
होश कब कैसे बेकाबू हो रहे
हम तुम्हारी अदाओं के
कायल हो रहे
जब भी हम तुम्हारे
ख्यालों में खो जाते हैं
वक़्त बेवक़्त तेरी यादों
की उलझनों में बिखर से जाते हैं

15 Jun

लिखने मे भी आनन्द कहाँ आता है

आप कि खातिर
आप कि कसम
कहने को हम जी रहे है
पर तुमसे मिलने कि
आस मे तड़प से रहे है
वक़्त वो पल भर मे गुजर जाता है
जिस पल मे तुम्हारा साथ घुल जाता है
और सुनो रानी तुम पास ना हो तो
लिखने मे भी आनन्द कहा आता है