Shayari ki Dukan

15 Jun

ब्लैक To White

हमारी जिन्दगी के हर रंग से कहीं न कहीं CONNECTED ही होता है पैसा , वो पैस जो हमारी जिन्दगी को आसान बना देता है ,  बशर्त उसमे प्यार हो , मोहब्बत हो , किसी अपने का साथ हो , और जिन्दगी मेहरबान हो ।
आज एक कहानी उस पैसे की सुनाते हैं , जो कहाँ का कहाँ पहुँच जाता है । मैं एक रूपये 500 का नोट हूँ । 12 DEC 2004 को मेर जन्म हुआ और हमारे बाप का चेहरा मेरी पहचान बना । RBI से SBI पहुंचा और वहाँ से एक आम इंसान की जेब में , जो मुझे रखना तो बहुत चाहता है , पर बेचारे के महीने के खर्चे ही उसे महीने के आखिर में कर्जदार बना देते है । जिसका एक भरा पूरा परिवार हो , जिसकी आँखों म जीवनसाथी के लिए बेहिसाब प्यार हो , पर कमबख्त वक्त यही दगाबाज़ हो उस की कद्र भला कौन करे । सरकारी अस्पताल में माँ को भर्ती कराया था उसने , डॉकटर ने कहा ऑपरेशन करना पड़ेगा । पर डॉकटर को ऑपरेशन से पहले की बड़ फ़ीस भी तो देनी थी । सो मैं अब डॉकटर साहब का हो चुका था । देखा आपने मैं कैसे आम आदमी की जेब से डॉकटर साहब के महंगे पर्स में समा गया । डॉकटर साहब फ़ोन पर बतिया रहे थे । कहीं किसी डील की बात हो रही थी । उन्होंने मुझे एक सूटकेस में रख दिया । जहां मुझ जैसे जाने कितने ही नोट थे । वो भी मेरी ही तरह जाने कहाँ –कहाँ से आये थे । सुनने में आया डॉकटर साहब कोई ज़मीन का सौदा करन जा रहे थे ।
मैंने सुन वो कह रहे थे 60% सूटकेस में हैं और 40% का चेक है । वो किसी बिल्डर से बात कर रहे थे । साथी बताने लगे हम सब ब्लैक मनी हैं । मैंने पूछा भल वो कैसे , त वो कहने लगे लगता है तू नया आया है , सुन अगर यह डॉकटर हमार जानकारी सरकार को दे दे तो उसे टैकस चुकाना पड़ेगा और अगर ज्याद शॉपिंग करे , महंगी गाडिया ख़रीदे तो इनकम टैकस की RAID भी पड सकती है । आजकल सबसे सेफ तरीका है काले को सफ़ेद में बदलने का प्रॉपटी खरीदो 50 की और रजिस्ट्री कराओ 20 की हो गये ना 30 काल वाले सफ़ेद । यह इंसान बड़ा तेज़ होता है । एक और किस्सा सुनाऊूँ एक शोरुम के मालिक का पहले मैं वही था । मैंने देखा साल भर वहाँ मक्खियाँ उड़ती थी और मगर फिर भी कोई कस्टमर आता तो कोई डिस्काउंट नहीं , कहते फिक्स्ड रेट है , आइटम आउटडेटेड हो रहे थे , पर मालिक के चहरे पर शिकन तक नहीं थी समझ में नहीं आता था । यह परिवार को कमा के क्या खिलाता होगा । पर जब उसके और उसके परिवार क ठाठ देखे तो लगा जैसे कोई पुराना रईस है । पर बाद में समझ आय वो तो कुछ और ही धंधा करता था , वो भी ऐसा चाहे मार्किट कितना ही मंदा हो , पर खूब दौड़ता था उसका धंधा । मैंने पूछा भाई ऐसा कैसा बिजनस था । त वो कहने लगा तू अभी बच्चा है नहीं समझेगा । बातों – बातों में , कुछ चंद मुलाकातों में मैं बड़ा हो गया । मैंने सुना था अगर कभी बैंक जाओ तो समझ लेना की उस दिन , हम सफ़ेद ह जायेंगे । अरे नहीं यह कोई बैंक नहीं लगता , अरे यह तो पोस्ट ऑफिस है भला मेरा यहाँ क्या काम । आज मुझ जैसो के बदले कोई किसान विकास पत्र लिया जा रहा था । वहाँ पोस्ट ऑफिस के कर्मचारी बतिया रहे थे की 01 जनवरी 2015 से 2005 से पहले के नोट बंद हो रहे हैं और जब से यह खबर आई है मुझ जैसे जाने कितने ही आज रिटायर होने को पोस्ट-ऑकिस में भर्ती हो रहे हैं । चलो कम से कम मोदी सरकार की वजह स जीवन के आखरी क्षण तो राहत में गुजरेंगे । और जो रिटायर नहीं हुए वो देश की प्रगति में हाथ बताएँगे । आप सभी से गुजारिश है मुझ जैसे नोट को अगली दफा निर्जीव ना समझना । और फिर कभी न कहना की पैसा हाथों की मैल होता है । मैल तो इंसान की नीयत में छुपा मैंने बेहद करीब से देखा है ।

15 Jun

मेरी पहचान

कभी-कभी मन में आता है की सब शोर शांत हो लिए , कहीं दूर जाएँ और खुद से मुलाक़ात कर आयें पर इंसान इस कदर दुनियादारी में उलझा पड़ा है की मंदिर जाने के पहले भी उसे स्वयं का अपॉइंटमेंट लेना पड़ता है ।मगर जरा सोच के देखो क्या ऐसा हो सकता है की हम इस दुनिया में रहके इससे अलग हो जाएँ ।पर एक काम जरुर कर सकते हैं । वो है स्वयं की एक अलग दुनिया बसाएं । जो पसंद ह वो स्वयं करें मस्ती में जिएं यह जीवन यूँही चलता रहेगा हमारे चेहरे बदलते रहेंगे । पर कितनी ही सदियाँ बीत जाएँ , हम अपने अस्तित्व को चाह के भी नहीं मिटा पाएंगे । जो कोशिश करनी ही है तो खुद की कमियों को दूर करने की करें , बाकी सबकुछ हमारी राह ढूंढता हमारी ओर आ जायेगा ।
नदी किनारे एक साधु बैठे ताप कर रहे थे । तभी एक पुरुष रोता – रोता साधु के पास आया और बोलने लगा मेरा पूरा परिवार मुझे छोड़ गया । मुझे अपन शरण ले लो अब तो यह जीवन आपकी ही सेवा में गुजरना चाहता हूँ ।
साधु बाबा ने उसके सर पे हाथ फेरते कहा बेटा हम तो दिन रात यहीं ताप करते हैं , उस प्रभु को याद करते हैं । जो तुम हमारी सेवा करोगे तो हमारा ध्यान भटक जाएगा । तुम भी यहीं बैठ जाओ और उस प्रभु का ध्यान करो बाबा पर में अपने परिवार को खोके कैसे …….. और वो रोने लगा । बाबा बोले बेटे जैसी करनी वैसी भरनी |
तभ वो रोते-रोते रुका और बोला बाबा मैं तो हर पल अपने परिवार की खुशियों के बारे में सोचता और करता था । कहीं कोई दुःख उन्हें घेर ना ले इसलिए आगे से आगे उनकी हर ख्वाहिश का ख्याल रखता था ।
तभी बाबा बोले हम आज की बात नहीं कर रहे पिछले जन्म में तूने अपने परिवार को बहुत दुःख दिए , कभी-भी उनकी परवाह नहीं की , न माता – पिता की , ना धर्म पत्नी की यहाँ तक की अपने बच्चो की भी नहीं । तब तूने उनके साथ रहते भी उनका कभी साथ नहीं दिया । इसी कारण वो आज तुम्हे छोड़ के चले गए । पर वो किर से तुम्हार जीवन में आयेंगे और कहीं फिर से तुम वो गलती ना दोहराओ इसलिए कहता हूँ की उस प्रभु का स्मरण करो और उस प्रकाश को अपन जीवन में विराजमान करो की अन्धकार कितना ही छा जाए तुम्हारे अन्दर जो लौ जलती रहे आने वाला वक्त बड़ा बलवान होता है जरुरी है इस पल का सदुपयोग और इतनी बात सुनते ही वो वहाँ से उठा और अलग जाकर प्रभु का स्मरण करने लगा । बरसो तपस्या करने के बाद वो प्रभु को प्यारा हुआ और किर से इस धरती पे जन्म लिया । बचपन गुजरा , जवानी आई , धीरे-धीरे उसके भीतर एक हलचल सी होने लगी और उसे मंदिर जाकर वक्त बिताना अच्छा लगने लगा परन्तु धीरे-धीरे उसमे आडम्बर के प्रति आकर्षण जागने लगा , जीवन यूही गुजरने लगा ।
उसकी भक्ति की चर्चा चारो और होने लगी । लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आते और उनसे हल बताने की कृपा करत जल्द ही उनका प्रभु के पुत्र के रूप में गुणगान होने लगा। लोग उन पर आँखे मूँद कर विश्वास करने लगे । पर कहते है ना जब लोग आप के पीछे चलने लगते है तो कई बार ऐसा होता है की उनका मार्गदर्शन भी अपना ध्यान भटक जाता है । उसे पद का मोह , अपना अभिनन्दन रास आने लगता है और दूसरो को राह दिखता – दिखता खुद ही भटक जाता है | जहाँ पहल वो हर कार्य के पहले प्रभु का स्मरण करता था , वही अब वो चाटुकारों से घिरा रहने लगा तथा इंसानों को उंच-नीच की भावना से देखने लगा उसके चाटुकारों की सोच उस पर हावी होने लगी ।
तभी उसने एक विवादित फैसला लिया । कथित नीच जाती वालो के मंदिर में प्रवेश पर रोक लगा दी । कुछ दिन यूँही बीत गए । फिर एक दिन उन्हीं के कुछ शिष्यों ने षड्यंत्र कर उन्हें जहर खिला दिया । इस प्रकार वे फिर से अपन शरीर छोड़ गए । कुछ समय पश्चात जब उनके द्वारा रचित उंच – नीच का भेदभाव पुरे समाज को ग्रास बन निगल रहा था तब एक निर्धन तथा कथित नीच परिवार में उन्होंने फिर से जन्म लिया । आज उन्हें उसी मंदिर में जाने की अनुमति ना थी जहां क वो सर्वसर्वा हुआ करते थे । उन्होंने कई प्रयास किये ताकि यह भेदभाव मिटाया जा सके । उन्होंने इश्वर की उपासना का अनूठा तरीका ढूढ निकाला उन्होंने कहा इश्वर मंदिर में ही नहीं अन्यथा सर्वत्र हैं । हम सब में विराजमान हैं इन सब बातों का मैथ वालो ने खुलकर विरोध किया । पर धीरे – धीरे लोग उन्हें सुनने दूर – दूर से आने लगे , पर समाज क ठेकेदारों को यह सब नामंजूर था । अतः उन्होंने उन्हें उनके परिवार सहित कहीं दूर समुंद्र पार कारावास में डलवा दिया । एक – एक कर परिवार का हर सदस्य संसार को चद चला गया और उन्हें भी अधमर जान नदी किनारे फेक दिया गया | वहाँ उनकी भेंट उन्हीं साधु से हुयी । उन्होंने साधु को प्रणाम किया साधु ने उनके सर पे हाथ फेरा तो उन्हें सारे पिछल जन्मो का ज्ञान हो आया । जैसे  ही साधु की आूँखों में देखा उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया और परिवार बिना खुद को निर्जीव समझ अपनी देह त्याग दी ।
आखिर ऐसा क्या हुआ की साधु की आँखों में देखते ही उन्हें अपने परिवार की याद आई और उन्होंने क्यूँ सवाल नहीं किया की मेरे साथ ऐसा क्यूँ हुआ। दरअसल उन्हें समझ आ गया क जो जीवन हमें प्रभु ने दिया है उसका सही अर्थ तभी निकलेग जब हम उनके द्वारा सौंपे गए हर कर्म का निर्वाह सही से करें , ना की हमें अपनी जिम्मेदारियों से भागना है , इस तरह हमें खुद को देवता समझने की भूल भी नहीं करनी अन्यथा उसका प्रायश्चित हमें अपनों से दूर रहकर ही करना पड़ेगा । एक इंसान के लिए सबस जरूरी कुछ है तो अपने परिवार के हितों का ध्यान रखना , उन्हें प्यार करना , अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करना ।
अब जब वे पुनः इस प्रथ्वी पर लौटे तो अपने परिवार की हर छोटी – बड़ी ख़ुशी समझते थे । अपने परिवार के संग समय व्यतीत करते तथा काम मन लगाकर करते , झूठे दिखावे से दूर रहते किसी की तारीफ़ सुन सातवे आसमान में नहीं चढ़ते । अपने परिवार के लिए कुछ करके ही उन्हें ख़ुशी मिलती । इस तरह प्यार की राह पर चलते – चलते उन्होंने अपना यह जीवन बिताया ।

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दूर हुई
उनक जीवन से मोह माया ।
बदल गयी उनकी काया ।
भरी धुप में भी रहती थी
उनके जीवन में छाया ।
आज जाके मैंन जीने का
असली ढंग पाया ।
खुशनसीब हूँ की मैंने ऐसा
सुंदर परिवार पाया ।

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14 Jun

आर्यन -The Hero

रोज़गार की खोज में एक नौजवान निकल पड़ा था । किस ओर जाये इस ख्याल में जा बैठा पीपल की छांव में । किर ज्यों ही उसने आूँखें बंद की । ना जाने कब उसकी आँख लग गयी। दोपहर की शाम हो आयी। बांसुरी की मधुर धुन जैसे उसी को पुकार रही थी । सपनो की दुनिया उसे भरपूर संभाल रही थी। देर रात भूख के मार वो नींद से जागा । उसे किसी के कदमो की आवाज आयी। दो चोर खेत में से बोरियां चुराने की बातें कर रहे थे। नौजवान चुपके से उनके पीछे चल दिया। वो चोर जैसे ही चोरी को अंजाम देते उसके पहले युवक ने उन पर लाठियों से प्रहार कर दिया।
शोर सुन गाँव वाले इकटठे हो गए। जब उन्हें सारी बात पता चली तो पहले तो चोरों की जमकर पिटाई की । और उस युवक का धन्यवाद किया तथा उसकी आवभगत में लग गए। सुबह गाँव में यह बात आग की तरह फ़ैल गयी की किस तरह नौजवान ने बहादुरी का परिचय देते हुए चोरों की पर्ची काटी। युवक गाँव के बहुत कहने पर वो दो दिन के लिए उनका मेहमान हो गया। युवक गाँव की सैर को निकला । उसने देखा की गाँव में बिजली की समस्या है। इसी वजह से किसान कुएं से पानी निकाल कर सिंचाई कर रहे हैं। रात को भी अंधेरे का फायदा उठा चोर चोरी को अंजाम दे रहे थे।
नौजवान को ग्रामीणों की समस्या साफ़ साफ़ दिखायी दे गयी थी। क्यूंकि नौजवान पढ़ा लिखा था। उसे गाँव की समस्या का एक ही समाधान नज़र आया। और वो थी electricity । मगर गाँव में बिजली कैसे आएगी। युवक ने इतना भर सोचा ही था की एक ग्रामीण दुखी होता शहर से लौट रहा था । युवक ने पूछा भैया क्या हुआ । किसान कहने लगा शहर की मंडी बड़ा बुरा हाल है भाई , कितना ही बढ़िया किस्म का अनाज़ हो , किर भी मंडी में अच्छा भाव ही नहीं मिलता । तभी युवक को एक बात याद आयी ।
एक दिन जब वो चाय की दुकान पर चाय पी रहा था । कुछ लोग मंडी की ही तो बातें कर रहे थे , की कैस वो सब मिलकर मंडी में भाव घटाया व बढाया करते हैं। बेचारा किसान अच्छे दामों की आस में मंडी का गोदाम किराये पे लेता है । कुछ दिनों में किराए की रकम चुकाते चुकाते वो परेशान हो अनाज़ उन गिने चुने व्यापारियो को बेच जाता है । जो जानते बुझते अच्छे किस्म के अनाज़ को कम दाम में खरीदते हैं और बाज़ार में उसी अनाज़ के मुंह मांगे दाम मांगते हैं । बेचारा किसान करे भी तो कया करे। युवक सोच में था , की किस तरह से गाँव की मुसीबतों को दूर किया जाए।
वो खुद से ही सवाल कर रहा था , की आखिर हमारे कृषि -प्रधान देश में किसान की ऐसी कैसी दुर्दशा है। तभी उसे यह भी पता चला की गाँव में छोटी- मोटी संस्थाएं हैं वो किसानों को ऋण तो देती हैं पर बदले में भारी ब्याज वसूलती हैं। और अगर किसी कारण से ऋण न चुका पाएं तो उनकी ज़मीनों के कागज़ात विदेशी बैंकों ने गिरवी रख दिए जाते हैं । यह हमारे देश की त्रासदी ही है की युवा भी गाँव से शहर की और पलायन कर रहे हैं । और तो और एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखते । क्या हमारी पढाई हमें इतना भर भी लायक नहीं बनाती की हम उनके सुनहरे भविष्य की कल्पना कर सकें।
हम यह कयों नहीं समझते की अगर हमारे देश में किसान का ऐसा बुरा हाल होगा तो आने वाले वक्त में हमें शायद अनाज़ भी भारी मात्र में आयात करना पड़ेगा। क्यूंकि किसानों की अगली पीढ़ी अगर अपनी ज़मीनें builders को बेच देंगी तो हम चाह कर भी देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पे नहीं ला पायेंगे। युवक को समझ ही नहीं आ रहा था वो करे तो क्या करे । वो गाँव मदद करना चाहता था ।पर क्यूंकि वो स्वयं रोज़गार की तलाश कर रहा था ,वो चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा था।
युवक ने गाँव के कुछ पढ़े लिखे युवको से इस मसले पर बातचीत की उन्ही में एक जिसका नाम सुरेन था उसने युवक से उसका परिचय पूछा युवक ने बताया उसका नाम आर्यन है और वह इस गाँव के लिए कुछ करना चाहता है और साथ ही उन सभी का साथ । आर्यन वैसे भी उन सभी नज़रो में हीरो बन चुका था (कल रात की घटना के बाद) । सो सुरेन ने आश्वासन दिया की वो अपने सभी साथियों को एकत्रित करेगा और आगे की रणनीति के लिए कल सभी की आर्यन से मुलाकात भी करायेगा । आर्यन खुश था लेकिन एक बात उसे सोचने पर मजबूर कर रही थी की क्या सब उसका साथ देंगे ।
आर्यन ने कल की तैयारियाँ शुरू कर दी। भोर हो चुकी थी सुरेन सभी को लेके पहुूँचता ही होगा आर्यन सोच रहा था। जब सुरेन 10-12 साथियों के साथ आर्यन के पास पहुंचा और सुरेन न जब आर्यन का परीचय अपने साथियों से , यह कह करवाया की यही ह जो है हमारी ही उम्र के पर इनकी सोच हमसे कहीं आगे की है क्यूंकि जितना हम अपने गांव को जानते हैं उससे कहीं ज़्यादा इन्हें पता है हमारी और हमारे गाँव की असली समस्याएं । आर्यन ने सुरेन का शुक्रिया अदा किया और कहा की आप मुझ शर्मिदा कर रहे हैं | जो सपना हम सभी का है उसे अब हम सब ही मिल कर पूरा करेंगे।
राइ का पहाड़ बनाना – यह कहावत तो आपने सुनी ही होगी, ओर ना चाहते हुए भी हम इसे इतनी तन्मयता से अपन जीवन में उतारे हुए हैं की हमें भी नहीं मालूम, अगर हम इसे त्यागदे तो हम अपने आप के लिए ख़ुशी के कितने ही द्वार अपने लिए खोल सकते हैं । अगर उर्जा सही दिशा में लगाय जाए तो अविश्वनीय परिणाम आ सकते हैं। हम दिन भर में ना जाने कितने ही ख्याली पुलाव बनाते हैं, और सच्चाई के सामने आते ही हालातों को दोषी ठहराते हैं। धैर्य नाम के साथी का साथ हम लेना ही नहीं चाहते।
हम मंदिर जाते हैं पूजा करते हैं , मुराद मांगते हैं और टेलीफोन रिंग बजती है तो सोचते हैं भगवान् ने मेरा काम कर दिया। हम हमेशा output के बारे में सोचते हैं input apply करते वक्त भी। अगर माँ खाना बनात वक्त सही मसालों का इस्तेमाल ना करे तो क्या खाना स्वादिष्ट बना पाएगा? लक्ष्य की सोच कर अगर हमारे प्रयास में तेजी और पैनापन आता है तो हम अपनी मंजिल के और करीब आते हैं । वही negative approach रखने वाले हमेशा लक्ष्य और प्रयास किये जा रहे वक्त की स्थिति के बीच की खाई को ही नापते हैं और उदासीन हो जाते हैं।
सोच कर देखिए अगर 400m दौड़ में runner अगर हर 100m पर घडी देखे तो क्या वो  अपने लक्ष्य की प्राप्ति कर पायेगा। जरूरत तो है घडी देखने की पर उस समय जब 400m का distance cover हो जाए। हमें समझना होगा की हर प्रयास हमें लक्ष्य की ओर ही धकेलता है, बशर्त अगर हम विफलता का आकलन कर अपनी नकारात्मकता को दूर करें । हम क्यों विफल होने पर हालातों को दोषी ठहराते हैं। वही अगर सफल हो जाएँ तो उन हालातों के बारे में ज्यादा ना सोचते हुए इस सफलता को अपना मान लेते हैं। पर यह सफलता नाममात्र है।
सफलता में इन हालातों के मायने आप विवेकानन्द , रानी लक्ष्मीबाई , शहीद भगत सिंह से जानिये । इन सभी के लिए सफलता प्रयासों में निहित थी। ना की किसी विषय – वस्तु की प्राप्ति में। आज हमारे लिए सफलता का मतलब है , अपने काम की तारीफ़ बॉस के द्वारा , करीबी दोस्तों के द्वारा, परिवार के द्वारा आदि । इसका मतलब मैं , मेरे कार्य दूसरों के मोहताज रहते हैं। मैं अपनी असफलता का बखान दिन में जाने  कितनी बार खुद से , अपने दोस्तों से करता हूँ। पर मेरी सफलता को , उसके लिए किये गए मेरे प्रयत्नों को ज़ुबान नहीं मिलती।
हम क्यों खुद ही को कमजोर बनाय जा रहे हैं। कुछ बुरा होने के पहले हम खुद को इतना डरा देते हैं की हम ही खुद को खुद ही से अलग कर देते हैं , तो हम अपने इस बुरा वक्त में किसी ओर से क्या उम्मीद लगा सकते हैं। कई बार तो हम खुद को दया का पात्र तक बना बैठते हैं। अगर गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ अपनी पुरानी performances की सोच को खुद पर हावी करेंगे त वो कभी भी अपना सर्वश्रेष्ट्र नहीं देगे । Confusion को अगर अपनी जिन्दगी से आउट करना है तो उसका सबसे आसान तरीका है priority set , जी हाँ अपने जीवन में अपने करीबियों को priority no. देना शुरू कर दे । अपने परिवार , दोस्तों , ऑकिस , girl friend और सबसे जरुरी आपका लक्ष्य , सभी को no. देकर क्रम बद्ध कर दीजिये और कुछ समय की practice के बाद आप इस क्रिया में सहज महसूस करेंगे ।

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चुनौतियों की कसक पे
खरा उतरूंगा
बेलगाम दौड़ते इस वक़्त के
हर इम्तिहान की कसौटी पे
मैं खुद को परखूगा
जो कुछ ना कर सका
अपने डर को ना हर सका
तो कह दूगा इस दुनिया से
चला था अपनी हस्ती बनाने को
कया हुआ जो राख में मिल गयी
हमारे सपनो की उड़ाने
किर भी……….
हम भूलेंगे नहीं
हम टूटेंगें नहीं
क्योंकि हम हैं
अपने सपनों के दीवाने
सच्चे परवाने
हर फिक्र से अनजाने
बस कहते रहो खुद से
करना है करेंगे
हर चुनौती से लड़ेंगे
और…………..
अपने डर से ना डरेंगे

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“जो हारना जानता है उसे जितने से कोई नहीं रोक सकता”

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हम वर्तमान में कार्य की विधि और उसकी पूर्णता पर ध्यान केंद्रित करने की वजह , भविष्य में उसके द्वारा प्राप्त होने वाली सुविधाओं पर क्यों ध्यान क्रेंदित करते हैं। जीवन में हर कार्य के होने का अपना से होता है । उदाहरणार्थ :- किसान कृषि के शुरूआती समय अपना पूरा ध्यान ज़मीन की किस्म व मौसम के आधार पर फल, सब्जी अन्यथा अनाज का चयन न करे और साथ ही साथ ज़मीन की पोषकता को बढ़ाने के उपाय ना करे । तो क्या अच्छी फसल की उम्मीद क जा सकती है । इसी सवाल में हमारा जवाब छुपा है ।
आर्यन की बातों का जादू सभी पर हो चुका था। और अब सब आर्यन का साथ देने को तत्पर नज़र आ रहे थे । अब सभी आर्यन से यही जानना चाहते थे , की शुरुवात कहाँ से और कैसे की जाए । आर्यन ने बताया की शुरुवात हमें अपने घर से ही करनी है । हमें अपने – अपने खेतों की फल और सब्जियां एक जगह एकत्रित करनी होंगी । अब हम मंडी के भरोसे अपनी मेहनत को यूँही ज़ाया होते नहीं देख सकते हमें मंडी के सामानांतर अपनी स्वयं की मंडी खड़ी करनी ही होगी और इसके लिए हम technology का साथ लेंगे और स्वयं की ऑनलाइन मंडी भी बनाएंगे जहां आस-पास के गाँव और शहरों में हम अपने हल , सब्जियां व अनाज की पैदावार से पहले ही बुकिंग भी कर सकेंगे । शुरुवात में थोड़ी सी मुश्किल होगी और उससे बचने का एक तरीका है की हम अपनी पैदावार का 25℅ हिस्सा ही शुरू में स्वयं बेचेंगे और बाकी बचा 75℅ शहर की मंडी में । हम ऑनलाइन बुकिंग के साथ अपनी पैदावार को छोटे-छोटे outlets के द्वारा आस-पास के गाँव और शहरों में बेचेंगे । साथ ही अपनी ऑनलाइन बुकिंग का प्रचार भी उन outlets पर करेंगे । हमारा second step होगा ज़्यादा से ज़्यादा गाँवों को अपनी मुहिम का हिस्सा बनाना । क्योंकि ऐसा करने से हमारी पैदावार का market स्वतः ही बढ़ जायेगा और साथ ही अन्य गाँवों का भी । धीरे-धीरे हमारी शहर की मंडी पर dependency कम हो जायेगी और उन की कालाबाज़ारी पे लगाम भी लग जाएगी ।

14 Jun

लिखने मे भी आनन्द कहा आता है

आप कि खातिर
आप कि कसम
कहने को हम जी रहे है
पर तुमसे मिलने कि
आस मे तड़प से रहे है
वक़्त वो पल भर मे गुजर जाता है
जिस पल मे तुम्हारा साथ घुल जाता है
और सुनो रानी तुम पास ना हो तो
लिखने मे भी आनन्द कहा आता है

14 Jun

तेरे कदमो पे करते हैं निसार

मेरी ख्वाहिसों को रंगीनियत का एहसास दिला रही
मेरे ख़्वाबों में तुम इस कदर छा रही
जन्नत की मन्नत अब हम क्यूँ करें
आशियाने में अपने तेरी जुल्फों में क्यूँ न डूबा करें
इतनी हसीन हो और कहती हैं तारीफ़ भी न कया करें
जिन्दगी को गुलाबों से महका के
मुझे अपना बनाके
तेरे एहसान हम कैसे चुकाए
तेरा एहसास हम कैसे भुलाएं
जीवन की रफ़्तार
रुक – रुक कर रही इश्तिहार
तेरे किमो पे करते हैं निसार
यह दुनिया यह जहां यह बहार

14 Jun

अब हार पे मुस्कुराना भी आ जायेगा

अब हार पे मुस्कुराना भी आ जायेगा
तेरे प्यार में रहे तो खिलखिलाना भी आ जायेगा
मुश्किलो से भला हम क्यु डरें
तेरा साथ मिला है जब से
आँखोंमें नए नए सपने से हैं भरे
आसान हो गया है अब जीना
वो वक़्त पीछे छूटा
जब रखना होता था होठों को सीना
अब गुनगुनाने में दिल बहल जाता है
तुम पास हो ना हो
जिक्र तुम्हार खुद ही से हो जाता है
तेरे आने की दस्तक सुनते ही
दिन कब कैसे
इंतज़ार में तुम्हारे
हाथों से फिसल सा जाता है
अब तो तुमसे मिलके ही
यह दिल सुकून को पाता है
कई दफा तनहा रातों में
तुम्हारी हसरत में
यह मन मचल भी जाता है
अब तो बहती हवाओं की धुन में भी
नाम तुम्हारा ही सुनने को
जी चाहता है

13 Jun

पढो विवेकानंद और ओढो उनके विचार

सुनोगे उस नोजवान की दास्तान ,
जिसने हमको डर से लड़ना सिखाया था |
डर किया है कुछ भी तो नहीं ,
हमें अच्छी तरह समझाया था |
सिंघनाद कर आगे बढ़ो ,
उठो, जागो और कुछ तो करो |
भक्त बनो पर कर्म भी तो करो |
यह पाठ पढाया था |
शिक्षा के सही अर्थ को सिखलाया था |
चरित्र निर्माण को सर्वोपरी बताया था |
कितने ही युवको के प्ररक थे वो ,
भगत , सुभाष , अरविन्द घोष
के विचारो के आधार |
उनसे प्रेरणा ले चुके जाने
कितने कलेक्टर बेमिसाल |
कुछ बनना चाहते हो जो
तो जानलो एक बात |
करो खुद पर विश्वास
और आगे बढ़ कर ,
बढाओ दूजे के लिए हाथ |
पढो विवेकानंद को
और ओढो उनके विचार |

13 Jun

रिश्ते के मायने

रिश्तेनाते मिटटी में मिल जाए
भाई – भाई के काम न आये
जल्लादों के हाथों हो देश की सत्ता
न मिल फूल न पत्ता
समझने जरुरी हैं ,कुदरत के कायदे
मज़ा जिन्दगी में है ,
जब समझे रिश्तो के मायने

13 Jun

क्यों तूने माँ की अस्ति गंगा में ना बहाई ?

कहानी बड़ी अजीब सी लिखी नसीब की ,
जिस धरा की खाते थे रोटी |
उसी पे हुयी तेरी नीयत खोटी |
जिस माँ के हाथों में था चूरमा तेरे वास्ते|
उस माँ को मिली सुखी रोटी तेरे रास्ते |
उसके प्यार को भूल कोई बात नहीं |
उसकी हर इक बात को भूल कोई बात नहीं |
तुझे उसकी जरा भी याद न आई |
क्यों तूने माँ की अस्ति गंगा में ना बहाई ?

13 Jun

माँ जो तू न होती….

आँखे बंद जो करता तो चेहरा तेरा दिखता|
सपनो के गुलिस्तान में नया फूल तो खिलता|
जिन्दगी को रोशन करता धुप में जब घिरता |
टप टप पानी पसीना बना
अपने दोषों को चीरता |
हिम्मत और लगन के साथ
खुद को तनहा ही रखता |
विश्वास की डोर के सहारे डर को दूर भगाता |
मेरी माँ जो तू न होती तो
मिटटी को सोना कैसे बनाता |