Shayari ki Dukan

13 Jun

हम कौन है ये जान पाए थे

में मेरा नहीं तू तेरा नहीं |
इस जीवन में कोई अकेला नहीं |
अपनी सोच पे रखकर विश्वास,
जो खुद पर करते ऐतबार ,
तनहा नहीं होते आज |
अपने सपनों को पीछे छोड़ आये थे |
माँ के समझाने से समझ पाए थे |
हम कौन है ये जान पाए थे |

13 Jun

वाह रे हम वाह रे हमारे दीवाने

यहाँ की कहें तो वो बुरा माने |
हमारी कहो तो हम बुरा माने |
पीछे से कौन क्या कहें ,
हम क्या जाने |
सामने सब अपना माने |
हम क्या चाहे हम ना जाने |
दुनिया क्या चाह वो हम माने |
फिर भी सबसे बेहतर कहलाना चाहे|
कुछ अलग ना करे पर खुद को
औरों से अलग जाने |
वाह रे वाह रे हमारे दीवाने|

देश भक्ति कविता इन हिंदी
13 Jun

शहीदों को नमन

आज फिर हम तेरे लिए गायेंगे |
वो गीत फिर से गुनगुनायेंगे |
कुछ पल को हम शायद,
खुद को भी भूल जायेंगे |
आजादी हो चाहे दो पल की |
यह बात है हमारी धडकनों की |
धुंधली पड़ती उलझनों की |
यह कहानी है उन दर्पणों की |
जहां मिट जाती हैं बातें सरहदों की |
शहीदों की शहादत को याद करती |
इस मिटटी के कण- कण की |
यह कहानी है , तुम्हारे – हमारे इस वतन की |

13 Jun

हमने कान्हा को ढूढ़ लिया

तरस रहे हैं तेरी आस में |
भटक रहे हैं तेरी तलाश में |
ओ मेरे कान्हा तेरे बिना हम तन्हा |
जानते हो हमें फिर क्यूँ परखते रहे |
नाम तेरा ही हम हर पल जपते रहे |
धीरे – धीरे महसूस किया |
भटके हुए ने कुछ ढूंढ़ लिया |
हम बेवजह परेशान हो रहे थे |
तू तो मुझही में था ,
हम तेरी प्यास में कहाँ – कहाँ फिर रहे थे |
जानते हो हम अब सिर्फ कर्म कर रहे हैं |
फल की अब चिंता नहीं , हम तो अब हर पल को जी रहे हैं |

13 Jun

हमारा भारत है महान

आध्यात्म की परिभाषा जानने को |
विचारो से उनके अपना जीवन सवारने को |
चली पश्चिम की हवाएं ,
गंगा के मुहाने को |
जानकर भी कुछ बन रहे अन्जान |
सभी को होती है भले बुरे की पहचान |
जाग जा ओ इंसान |
हमारा भारत है महान |

13 Jun

PUSHPA I HATE TEARS

कहना कुछ भी हम तो जी रहे हैं हर पल |
जानता कुछ नहीं स्वाभाव से थ वो सरल |
प्यार कब हमारे जीवन का हिस्सा हो गया |
उनका हर किस्सा मशहूर हो गया |
चन्द पलों म वो दास्तान यूँ बयान कर जाते थे |
हर तरफ खिलखिलाते चेहरे नज़र आते थे |
खुद पर जिसने ऐतबार ककया |
उसे खुदा ने कभी ना नज़रअंदाज़ किया |
काका की कहानी हमें तुम्हे सुनानी थी |
पहले सुपरस्टार की बात दोहरानी थी |
PUSHPA I HATE TEARS .
KAKA YOU ARE OUR DEAREST DEAR .

13 Jun

एक पैगाम है…….

बेहतरी को तेरी एक पैगाम है |
बरसों बाद तुम्हे देख हम हैरान हैं |
तुम वो  नहीं जो किसी के रोके रुकते ,
तेरी हस्ती तो कुछ और ही थी |
तुम वो नहीं जो चलते – चलते थकते ,
तेरी आँखों में नमी तो ना थी |
किस बात पे खुद ही से हुआ ख़फ़ा |
मिलने आये तुमसे हम कई दफ़ा |
हर पल सुखों के समन्दर नहीं होते |
छोटी -छोटी बातों पे ऐ दिल नहीं रोते |
ऐ जागती आँखों से सोने वाले |
सपने हक़ीक़त से रूबरू यूँहीं नहीं होते |

13 Jun

आओ इंसानियत सिख ले

किस्मत भी क्या – क्या खेल  खिला रही |
रोते हुए को हंसा रही |
कहीं जख्मों पर मरहम लगा रही I
अन्जाने में की गलती तो शायद खुदा भी माफ़ कर दे |
पर जब कोई खुद ही को खुदा समझे ,
तो नाटक के बीच ही में गिर जाते हैं परदे |
एक छोटी सी भूल बरसों पीछे ले जाती है |
मैं की आग में जान छटपटाती है |
हम क्यूँ न इस मैं को जीत ले |
इंसान हैं हम , आओ इंसानियत सींख ले |

13 Jun

हम चले जाते हैं…….

जीवन में उचाईयों की ख्वाहिश ,
हमें तन्हा कर जाती हैं ,
अपनों से दूर बहुत दूर ले जाती हैं |
जीवन में गहराइयाँ ,
हमें अपनापन दिलाती  हैं ,
अंजानो के प्यार का भी एहसास कराती हैं |
सही मायनों में गहराइयाँ ही ,
जीवन में उचाइयां दे जाती हैं ,
जीने की बारीकियां समझाती हैं |
हम चले जाते हैं ,
हमारी बातें रह जाती हैं |

13 Jun

निर्मल बाबा की कृपा का नूर

यह वहाँ जहाँ भी जाऊंगा |
खुद को भूल नहीं पाउँगा |
कितना सच्चा कितना झूठा हूँ |
कहने से डरता हूँ |
जीवन की कसौटियो पर
खुद को परखना आसान नहीं |
यह जीवन  सिर्फ  सुबह शाम  नहीं |
मंजर बदल जाते हैं कुछ पाने की चाह में |
हीरे मिल जाते हैं कोयले की खदान में |
मिटटी में मिल जाता है गुरूर |
तभी होता है निर्मल बाबा की कृपा का नूर |