Shayari ki Dukan

13 Jun

हम चले जाते हैं…….

जीवन में उचाईयों की ख्वाहिश ,
हमें तन्हा कर जाती हैं ,
अपनों से दूर बहुत दूर ले जाती हैं |
जीवन में गहराइयाँ ,
हमें अपनापन दिलाती  हैं ,
अंजानो के प्यार का भी एहसास कराती हैं |
सही मायनों में गहराइयाँ ही ,
जीवन में उचाइयां दे जाती हैं ,
जीने की बारीकियां समझाती हैं |
हम चले जाते हैं ,
हमारी बातें रह जाती हैं |

13 Jun

निर्मल बाबा की कृपा का नूर

यह वहाँ जहाँ भी जाऊंगा |
खुद को भूल नहीं पाउँगा |
कितना सच्चा कितना झूठा हूँ |
कहने से डरता हूँ |
जीवन की कसौटियो पर
खुद को परखना आसान नहीं |
यह जीवन  सिर्फ  सुबह शाम  नहीं |
मंजर बदल जाते हैं कुछ पाने की चाह में |
हीरे मिल जाते हैं कोयले की खदान में |
मिटटी में मिल जाता है गुरूर |
तभी होता है निर्मल बाबा की कृपा का नूर |

13 Jun

ये एहसास नया नया है

एहतियात बरतते हैं की रिश्ता नया नया है |
दो ज़हान के मिल ने का सिलसिला नया नया है |
पल भर को चैन नहीं य वक्त ज़ुदा ज़ुदा है |
खुद ही में सिमट जाने का |
दुनिया को भूल जाने का |
ये एहसास नया नया है |

13 Jun

उम्मीदों की बरखा

नज़दीकियाँ हमारी |
दूर कर रही ,
बैचेनियों को हमारी |
प्यार के संग -संग
उठ रही एक तरंग |
जैसे तू डोर मैं पतंग |
शीतल काया तेरी , मेरे मन को मोह रही |
उम्मीदों की बरखा में जैसे भीगो रही |

13 Jun

चुरा लू तुम्हे तुम्ही से

कोशिशो को मेरी राहत है |
तू मेरी बरसों की चाहत है |
तू खूब , खूब तेरी नज़ाकत |
तू नूर , खूब तेरी शराफत |
हमको मंज़ूर तेरे ख्वाबों की हिफाज़त |
चुरा ले हम तुम्ही को जो तुम दो इज़ाज़त |

13 Jun

तेरे बिना खुद को अधूरा पाया

तेरी खामोशियाँ जवाब हैं , उन सवालों का |
तेरी मजबूरियाँ जवाब हैं , उन सवालों का |
जो पूछ रही थी मेरी सुबह – शाम |
तरस आता है खुद पे याद करूँ ज वो शाम |
प्यार से तेरे सबूत मांग रहा था |
मासूमियत को तेरी लाचारी जान रहा था |
दुनिया को पहचाना तो तेरा ख्याल आया |
तेरे बिना खुद को अधूरा पाया |

13 Jun

ख्वाबों में तेरे…..

ढूंढ़ रही हो हमें कहाँ -कहाँ |
पिछली रात चाँद ने तुम्हे क्या कहा |
हमारी मुलाकातों के किस्से हो रहे |
तारे भी हमारी बातों में खो रहे |
झरोखे से हमें निहारे रही |
दिलमें हमारे झाँख रही |
अपनी किस्मत पे हमको यकीन हो गया |
ख्वाबोंमें तेरे में शरीक हो गया |

13 Jun

ना जाने तुम कहाँ गए

हालातों के मद्देनज़र एक ख्याल आया |
किताबमें रखा बरसो पुराना गुलाब
जो नज़र आया |
दुनियादारी में हम क्या से क्या हो गए |
चाहते थे उन्हें और उन्ही से दूर हो गए |
अरमान फिर जाग रहे |
उन्हें अपने मान रहे |
वक्त से कदम मिलाते – मिलाते ,
तेरी आहतों को भुला गए I
होश जो आये तो पूछ रहे ,
ना जाने तुम कहाँ गए I

13 Jun

वो इश्क ही क्या जहां तेरी रजा नहीं

मोहतरमा , इश्क ह वो जुनून |
जो देता सुकून |
इश्क मखमली चादर |
जैसे मीठे पानी का सागर |
इश्क करन वाले के दिलों में
इश्क ही बसा करता है |
सामने से कोई जवाब आये न आये ,
उनकी बेहतरी की फ़रियाद किये  करता है |
इश्क कोई सज़ा नहीं |
बिन तेरे मज़ा नहीं |
वो इश्क ही क्या जहां तेरी रज़ा नहीं |

13 Jun

उम्मीद जागी

ओ सनम तेरे प्यार में खो गए हम |
रात भर जागे जुगनू बने हम |
तुमने कहा जब से जानेमन |
हम होश में नहीं हैं सनम |
ददि में उम्मीद जागी |
यूहीं मिलते रहे जनम जनम |