Sad Shayari

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22 Jun

आओ बीती बातों को

मिठास जो मेरी बोली में होती
मेरे और उसके कदमो के बीच
में इतनी दूरी ना होती
जब जब अपनी पलके उठाती
मुझे अपने सामने पाती
बस इतना सा ख्वाब ही तो वो
दिन भर अपनी आँखे में है सजाती
तो फिक्र क्यूँ औरों की करें
जब जिक्र हम तुम
आपस में कया करें
आओ बीती बातों को
हम रफा दफा करें

22 Jun

मेरा मैं न जाने कहाँ चला गया

देखना उन्हें चाहते हो
जो देख नहीं सकते
जानना उन्हें चाहते हो
जो बन नहीं सकते
उनका हाथ थामने को
बेक़रार बैठे हैं
कुछ उनकी याद में
उदास उदास हैं
भूलने की कोशीश बेकार है
उनका नाम लिया तो
ज़िंदगी भी उड़ने को तैयार है
वरना भटकने में गजुरते
यूँ ही दिन रात हैं
मैं उन्ही से मिलने की खातिर
उस आस्मां की और ताक रहा था
उनको पाने की खातिर
मन को अपने खंगाल रहा था
ना जाने कब समां बदल गया
मेरा मैं न जाने कहाँ चला गया
कब कैसे मैं
उनकी शरण आ गया

22 Jun

इश्क की इन गलियों में

जिन गलियों से गुजरने की
ख्वाहिश लिए चले जा रहे थे
जिस दुपट्टे के सरकने से
हम मचले जा रहे थे
आज उन्ही गलियों में
उसी दुपट्टे के सगं
उड़ने की चाहत
मेरे दिल में यूँ घर कर गयी
इश्क की इन गमलयों में जब
तू मेरी आँखे नम कर गयी
कल रात तमु चुपके से
हमें दुआ सलाम कर गयी

22 Jun

काबिलियत की तेरी

अर्जी को मेरी
मर्जी की तेरी
मोहब्बत को मेरी
इज़ाज़त की तेरी
सलामती को मेरी
हिफाज़त की तेरी
जरूरतों को मेरी
मुद्दतो से तेरी
ज़िन्दगी को मेरी
एक आदद
मुस्कान की तेरी
ख्वाहिशों को मेरी
काबिलियत की तेरी
बस इतना सा जानो
तमु राहत हो मेरी
हम खो बैठे है खुद ही को
हर आहात पे तेरी

22 Jun

वक़्त के साथ साथ

है अजीब ये कहानी
एक दीवाना एक दीवानी
और एक सयानी
दीवाना डूबा रहता था
सयानी के प्यार में
दीवानी बेबस थी
दिवाने के इंतज़ार में
सयानी को यह बात रास न आयी
और दी ने के दिल में
यह बात उसने बैठायी
शादी की कसमो को
उन अनकहे वादों को
निभाना
गुजरी बातो को
अपनी चाहतो को
वक़्त के साथ साथ
भूल जाना
है हमसफ़र वही जो संग
चल रहा है
मैं कुछ भी नहीं
देख तेरी खातिर
दीवानी का दिल मचल रहा है
यह सनु दीवाना भी अब
पल पल बदल रहा है

22 Jun

ये वो अनजाने थे

रंग वही पुराने थे
बस मिल  बैठ कर सजाने थे
कुछ दूर  साथ चले
ये वो अनजाने थे
राग अपने अपने
दोनों ही को सुनाने थे
एक साज़ में बंध चकुे थे
अपनी ही िदुनया में
वो रंग  चुके  थे
हलके से एक दिन आंधी
अहम् की उन दोनों के बीच गहरायी
और िदुनियां उन दोनों ने बढाई
क्या उन्हें एक दूजे की याद ना आई
ये कैसी बेरहम आग
उन्होंने अपने आँगन में लगायी

22 Jun

ये वो अनजाने थे

रंग वही पुराने थे
बस मिल  बैठ कर सजाने थे
कुछ दूर  साथ चले
ये वो अनजाने थे
राग अपने अपने
दोनों ही को सुनाने थे
एक साज़ में बंध चकुे थे
अपनी ही िदुनया में
वो रंग  चुके  थे
हलके से एक दिन आंधी
अहम् की उन दोनों के बीच गहरायी
और िदुनियां उन दोनों ने बढाई
क्या उन्हें एक दूजे की याद ना आई
ये कैसी बेरहम आग
उन्होंने अपने आँगन में लगायी

17 Jun

काश भारत में मेरे

काश भारत में मेरे
यूँ धुंधले ना होते  चेहरे ।
काश उड़ सकते पंछी
रात होती  या सवेरे ।
आँगन को मेह्काती बेटी
रख सकती कदम
चाहे होते रातों के अँधेरे |
काश समझ सभी को होती |
मर्यादा  एक मर्द होने की
उन दरिंदों के सिने में भी
काश उमड़ती |
एक कोशिश
आज़ादी को पाने की
बरसों पहले
सीने में हमारे थी सुलगती ।
वक़त की मांग है |
दर्द को झेलने में
नहीं कोई शान है |
अपने पुरषार्थ को जगाना होगा |
धूल खा  रही नैतिकता को
फिर से अपनाना होगा |
राष्ट्रर को  हमें अपने
सुन्दर और सुशील बनाना होगा ।
हर एक को अपने अन्दर के
दरिन्दे को मिटाना होगा ।
हर एक कह अपने  अन्दर के
दरिन्दे को मिटाना होगा ।

 

17 Jun

दिल की दरख्वास्त

इस रूह का एक ही मकसद
इश्क में जियें
इश्क में खिलें
इश्क में उडें
इश्क में डाले
एक दूजे की बाहों में
बाहों के हार
नज़रों में तेरी करें
अपनी मंजिलो की तलाश
और बह चले
उन हवाओं की सनसनाती रुत में
जहां हो तो सिर्फ तेरे प्यार की प्यास
कुछ ऐसी ही है
इस छोटे से दिल की दरख्वास्त

17 Jun

मेरी आह निकल रही

कशिश तेरी आखों की
मेरे दिल में
यूँ जगह कर रही
दबी जबान से जैसे
मेरी आह निकल रही
मुस्कान तुम्हारी
होठों पर कुछ यूँ बिखर रही
बड़ी मुश्किल में हैं
हमारी जान
देखो अब कहीं जाके
हमारी सांसें संभल रही