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20 Aug

कितना बदल सा गया हूँ

कितना बदल सा गया हूँ

आने से तुम्हारे

पहले बिखरा हुआ सा था

अब सिमट ही गया हूँ

दामन में तुम्हारे

अब दिल में नही

और कोई जज्बात

सिवाय तुम्हारे

मुझ बहती धारा को मिला ठहराव

मिल सागर में तुम्हारे

इतना ही कहना था हमें

जन्मदिवस पे तुम्हारे

हम थे

हम हैं

हम रहेंगे

सिर्फ और सिर्फ

बस तुम्हारे

19 Aug

क्या कभी किसी रोज

क्या कभी किसी रोज

वो दिन आएगा

जब तुम्हारे दिल से

वो पुराना दर्द मिट जाएगा

अपनी चुप्पी से मुझे क्यों

बारम्बार कातिल होने का

एहसास कराती हो

क्या तुम मेरे दिल में बैठे

दर्द को पहचानती हो

अब एक एक बात से

काँटों सा एहसास कराती हो

अपने दिल की बात

भला मुझीसे छुपाती हो

वैसे तो हमारी हमदर्द कहलाती हो

और न जाने कितने दर्द

अपने दिल में छुपाती हो

शायद अब तुम्हे मेरी जरुरत नहीं

मैं भी एक इंसान हूँ कोई मूरत नही

यही खड़े-खड़े

इंतजार तुम्हारा कर लेगे

आज नही कल सही

यह कह कहके

जिन्दगी का गुजरा कर लेगें

17 Aug

किस चिंता में मैं दौड़ चला

किस चिंता में मैं दौड़ चला

उस बेरंग दिशा की और

देखा तो शर्मिंदा हुआ

सोच में पड़ा

क्यों पकड़ी ऐसी पतंग की डोर

सोच में मेरी क्यों खोट हुई

क्यों मन आँगन आया मेर चोर

भटकन को मजबूर हुआ

ठोकर खायी सो मजबूत हुआ

भले-बुरे का बोध हुआ

और हमने फिर सोच लिया

धीरे धीरे ही सही

पहुंचेगे कही न कहीं

जहा होगी हमारी भी पहचान

कहलायेगे इक दिन

हम भी एक इन्सान

 

12 Aug

जब भी कोई ख्वाब पूरा हुआ

जब भी कोई ख्वाब पूरा हुआ

मेरा मन जैसे सुनहरा-सुनहरा हुआ

तुमसे जब जब मिलना हुआ

जहन में मेरे एक सवाल पुख्ता हुआ

की इतना हसीना ख्वाब

मेरा न जाने कैसे हुआ

किस तरह न जाने

मेरा मुकद्दर मुझपे मेहरबान हुआ

कैसे मेरे नसीब में फूलो का गुलिस्ता हुआ

कौन से कर्म की

या मेर धरम की

न कहना अब की मैनें लिखने में शर्म की

तुम मिली मुझे

क्यूकि खुदा ने मुझ पर रहमत की

11 Aug

सपनों की दुनिया

सपनों की दुनिया

में हकीकत के फ़साने

बंद आँखों के सपने

होते हैं लुभावने

दुनिया क्या जाने

मेरे सपनों की कीमत

मेरी मोहब्बत ही है

मेरी ज़ीनत

क्या कह रहा हूँ

क्या सोचा रहा हूँ

हकीकत से

दो दो हाथ कर रहा हूँ

एक गैर की चाहत में

दिन रात एक कर रहा हूँ

उस खुदा की रहमत हो

बस यही इन्तजार कर रहा हूँ

बस कुछ करने की ख्वाहिश थी

पर अपनों की खातिर

आज उनके ख्वाबो को जी रहा हूँ

10 Aug

मैं तुमको चाह कर भी

मैं तुमको चाह कर भी

चाह ना सका

मैं तुमको पा कर भी

पा न सका

अब अंधेरे में तुम्हारी

जुस्तजू की

क्यूँ फिर हमने तुम्हारी आबरू

की कद्र ना की

सब्र कैसे करे की

हम सदमे में हैं

किससे कहें

बेहतर होता की

वक्त पे काबू रख पाते

हम उन पलो के

दाग धो पाते

काश तुम जब भी कही जाती

हम तुम्हारे साथ हो जाते

09 Aug

प्यार तुम्हारा पाया

प्यार तुम्हारा पाया

रोशन हुआ मेरा साया

रात हो या दोपहर

बरसा रही हो

अपने हुस्न का कहर

जिस्म में लगी है आग

तुम्हे छूने भर से

तुम्हे पाने की ख्वाहिश रखते हैं

न जाने कब से

प्यास के अंगारे को और न भडकाओ

तडप रहा हूँ में

मेरी यह आग बुझाओ

आओ जरा पास हमारे

और प्यार की अलख जगाओ

love shayari
08 Aug

आज फिर सवेरा हुआ

आज फिर सवेरा हुआ

लेकिन सुनहरा हुआ

आगोश में तुम्हारे गुजारी थी

जो कल की रात

काश होता तुम्हारा हमारा

पल पल का साथ

रात हो जाती यूँही लिए

हाथों में हाथ

तुम्हारी साँसो में बस जाएँ हम

ये जिन्दगी यूँही गुजर जाये

तो न रहे कोई गम

चाहत से सराबोर हैं

तुम्हरे प्यार में मदहोश है

बहते झरने के मीठे जल

की मीठास लिए

मोहब्बत में अपने होठो को सिए

कुछ कह रही हैं

तुम्हारी खामोशियाँ

जैसे चाह रही है

थोड़ी और नजदिकिया

07 Aug

प्यार में तुम्हारे दीवाने हुए

प्यार में तुम्हारे दीवाने हुए

इस दुनिया में रहने के काबिल हुए

बातो में तुम्हारी शामिल हुए

जैसे खुदा की खिदमत में हाजिर हुए

फिर क्यूँ कहती हो

हम जालिम हुए

बस कुछ पलो के लिय ही सही

आज हम तुममे शामिल हुए

         प्रेम खत

मेरी प्रिय,

मेरी जानेमन यह कोई इतेफ़ाक नही की हम तुम मिले एक दूजे के हुए| यह सृष्टि की ख्वाहिश थी | हर फुल की गुजारिश थी | जिन्दगी तो दो पल की  भागदौड हैं| बस प्यार से तुन्हारे यह जीवन सराबोर है | लिखने की ख्वाहिश भी तुम ही से, कुछ करने की चाहते भी तुम ही से| जिन्दगी यूँही गुजर जायेगी, तुम्हारी जुल्फों की छांव में |

तुम्हारा प्रियतम

zindagi shayari in hindi font
06 Aug

हम young हैं

जब तलक दिल में उमंग हैं

रस्ते तंग हैं

फीर भी जिंदगी जल-तरंग हैं

जेब कटी पतंग है

फिर भी आनन्द हैं

हम अकेले हैं

फिर भी कोई संग हैं

जाने कौन सी है लहर

पी जातें हैं

कैसे – कैसे कडवे जहर

जिन्दगी बरसाती रहती है

कहर पे कहर

आसान नहीं होती हैं

यह जवानी की डगर

फिर भी सह जाते हैं

कुछ बनने की छह में

निकल पड़ते हैं जो

बस वही young हैं

हर राही हैं अकेला

जिसने थामा जिन्दगी का रेला

यह जिन्दगी उसी के संग है

बस वही young हैं

बस वही young हैं