Love Shayari

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22 Jun

काबिलियत की तेरी

अर्जी को मेरी
मर्जी की तेरी
मोहब्बत को मेरी
इज़ाज़त की तेरी
सलामती को मेरी
हिफाज़त की तेरी
जरूरतों को मेरी
मुद्दतो से तेरी
ज़िन्दगी को मेरी
एक आदद
मुस्कान की तेरी
ख्वाहिशों को मेरी
काबिलियत की तेरी
बस इतना सा जानो
तमु राहत हो मेरी
हम खो बैठे है खुद ही को
हर आहात पे तेरी

22 Jun

वक़्त के साथ साथ

है अजीब ये कहानी
एक दीवाना एक दीवानी
और एक सयानी
दीवाना डूबा रहता था
सयानी के प्यार में
दीवानी बेबस थी
दिवाने के इंतज़ार में
सयानी को यह बात रास न आयी
और दी ने के दिल में
यह बात उसने बैठायी
शादी की कसमो को
उन अनकहे वादों को
निभाना
गुजरी बातो को
अपनी चाहतो को
वक़्त के साथ साथ
भूल जाना
है हमसफ़र वही जो संग
चल रहा है
मैं कुछ भी नहीं
देख तेरी खातिर
दीवानी का दिल मचल रहा है
यह सनु दीवाना भी अब
पल पल बदल रहा है

22 Jun

ये वो अनजाने थे

रंग वही पुराने थे
बस मिल  बैठ कर सजाने थे
कुछ दूर  साथ चले
ये वो अनजाने थे
राग अपने अपने
दोनों ही को सुनाने थे
एक साज़ में बंध चकुे थे
अपनी ही िदुनया में
वो रंग  चुके  थे
हलके से एक दिन आंधी
अहम् की उन दोनों के बीच गहरायी
और िदुनियां उन दोनों ने बढाई
क्या उन्हें एक दूजे की याद ना आई
ये कैसी बेरहम आग
उन्होंने अपने आँगन में लगायी

22 Jun

ये वो अनजाने थे

रंग वही पुराने थे
बस मिल  बैठ कर सजाने थे
कुछ दूर  साथ चले
ये वो अनजाने थे
राग अपने अपने
दोनों ही को सुनाने थे
एक साज़ में बंध चकुे थे
अपनी ही िदुनया में
वो रंग  चुके  थे
हलके से एक दिन आंधी
अहम् की उन दोनों के बीच गहरायी
और िदुनियां उन दोनों ने बढाई
क्या उन्हें एक दूजे की याद ना आई
ये कैसी बेरहम आग
उन्होंने अपने आँगन में लगायी

17 Jun

वहीं तो रचा बसा होता हैं

बेदहसाब किताबे पढ़
कुछ कलमे गढ़
अनजानो ने सराहा
कभी कभी
मलिते मलिते
वो पा जाते हैं दोराहा
उन्हें भाता है रिश्तो का चोराहा
मलिने की आड़ में
खुद की पहचान में
वो बस चाहते हैं इक किनारा
वहीं तो रचा बसा होता हैं
उनकी खुशियों का नज़ारा
तो क्यूँ ना एक बार
ख्वाहिशो को अपनी
बहन दे मंजिलों तक अपनी
जहां बसती हो ऐसी बस्ती
आओ मिलकर करें
कुछ ऐसी करनी