Love Shayari

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13 Jun

माँ जो तू न होती….

आँखे बंद जो करता तो चेहरा तेरा दिखता|
सपनो के गुलिस्तान में नया फूल तो खिलता|
जिन्दगी को रोशन करता धुप में जब घिरता |
टप टप पानी पसीना बना
अपने दोषों को चीरता |
हिम्मत और लगन के साथ
खुद को तनहा ही रखता |
विश्वास की डोर के सहारे डर को दूर भगाता |
मेरी माँ जो तू न होती तो
मिटटी को सोना कैसे बनाता |

13 Jun

हम कौन है ये जान पाए थे

में मेरा नहीं तू तेरा नहीं |
इस जीवन में कोई अकेला नहीं |
अपनी सोच पे रखकर विश्वास,
जो खुद पर करते ऐतबार ,
तनहा नहीं होते आज |
अपने सपनों को पीछे छोड़ आये थे |
माँ के समझाने से समझ पाए थे |
हम कौन है ये जान पाए थे |

13 Jun

PUSHPA I HATE TEARS

कहना कुछ भी हम तो जी रहे हैं हर पल |
जानता कुछ नहीं स्वाभाव से थ वो सरल |
प्यार कब हमारे जीवन का हिस्सा हो गया |
उनका हर किस्सा मशहूर हो गया |
चन्द पलों म वो दास्तान यूँ बयान कर जाते थे |
हर तरफ खिलखिलाते चेहरे नज़र आते थे |
खुद पर जिसने ऐतबार ककया |
उसे खुदा ने कभी ना नज़रअंदाज़ किया |
काका की कहानी हमें तुम्हे सुनानी थी |
पहले सुपरस्टार की बात दोहरानी थी |
PUSHPA I HATE TEARS .
KAKA YOU ARE OUR DEAREST DEAR .

13 Jun

एक पैगाम है…….

बेहतरी को तेरी एक पैगाम है |
बरसों बाद तुम्हे देख हम हैरान हैं |
तुम वो  नहीं जो किसी के रोके रुकते ,
तेरी हस्ती तो कुछ और ही थी |
तुम वो नहीं जो चलते – चलते थकते ,
तेरी आँखों में नमी तो ना थी |
किस बात पे खुद ही से हुआ ख़फ़ा |
मिलने आये तुमसे हम कई दफ़ा |
हर पल सुखों के समन्दर नहीं होते |
छोटी -छोटी बातों पे ऐ दिल नहीं रोते |
ऐ जागती आँखों से सोने वाले |
सपने हक़ीक़त से रूबरू यूँहीं नहीं होते |

13 Jun

आओ इंसानियत सिख ले

किस्मत भी क्या – क्या खेल  खिला रही |
रोते हुए को हंसा रही |
कहीं जख्मों पर मरहम लगा रही I
अन्जाने में की गलती तो शायद खुदा भी माफ़ कर दे |
पर जब कोई खुद ही को खुदा समझे ,
तो नाटक के बीच ही में गिर जाते हैं परदे |
एक छोटी सी भूल बरसों पीछे ले जाती है |
मैं की आग में जान छटपटाती है |
हम क्यूँ न इस मैं को जीत ले |
इंसान हैं हम , आओ इंसानियत सींख ले |