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21 Aug Guest Post

Kurmit kawarpal from Mumbai

सब बदल जाते हैं यह हालातों की आदत है
कहबे को कुछ नहीं बस वक़्त वक़्त की मार है
इंसनियत आज के लोगों के लिए बेकार है
लोग किसी ओर के हो जाते हैं यह पैसे की रफ्तार है
जिस्म तो बिकते हैं यह जानते थे , पर रूह भी बिकने को तैयार है
तुझसे आज तक जुड़े हैं , यह बस मेरा प्यार है
वार्ना ज़माने के लिए हम पागल करार हैं
इंसान होके भी अमीर गरिब का फर्क बताता है
पता नही क्यों यह फ़क़ीर अपना मुकद्दर आज़माता है

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