प्रधानसेवक

13 Aug प्रधानसेवक

औरत को डायन समझ
जिस समाज मे
यातनाएं दी जाती हैं

जहां कुछ पैसों की खातिर
पंचों द्वारा बेगुनाहों को
सजा सुना दी जाती है

जिस सभ्य समाज में
औरत , वृद्ध और बच्चों
की सुरक्षा से ज्यादा
गोरक्षा की बातें की जाती हैं

वहां प्रधानसेवक द्वारा की जा रही
विकास की बातें
गले के नीचे उतर ही नही पाती हैं