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आसमान की चादर

रौनक लौट आयी
भीनी भीनी खुशबु हवा में समाई
मैं अभिभूत हूँ
देख तुम्हारे विचारों की गहराई
देखो ज़रा
आसमान की चादर भी कैसी जगमगायी
मन में मेरे है कशमकश
तुम तुम ही हो या हो मेरा ही अक्स
ढूँढना चाहे कोई तो भी ना ढूंढ सकेगा
तुम जैसा ओर कोई शख्स

This post was last modified on September 9, 2017 10:11 am