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दिल की भी तुम सुना करो

भविष्य को सवारने की खातिर एक कदम बढाओ
खुद की सोच को उस काबिल बनाओ
परवाह अपने सपनो की किया करो
एक कदम ही सही पर उस और बढ़ा करो
ज़िंदगी को अपनी कुछ इस तरह जिया करो
दुनिया कया सोचेगी इस परपंच में ना उलझा करो
समझो ज़रा खुद को
कभी कभी अपने दिल की भी तुम सुना करो

This post was last modified on September 9, 2017 10:18 am

Alok Yadav :