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आदतें हमारी तुम पहचानती हो

तसवीरें बोल पड़ेंगी
तकदीरें जाग उठेंगी
बजने लगेंगी शहनईयां
लुट जाएूँगी तनहाइयां
जब जब नज़रें तुम्हारी
हम से मुलाकातें करेंगी
आदतें हमारी तुम पहचानती हो
दूरियां हैं क्यूँ यह भी जानती हो
और क्या चाहे खुद से
जब तुम हमें अपना मानती हो

This post was last modified on September 9, 2017 10:12 am

Alok Yadav :