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आओ बीती बातों को

मिठास जो मेरी बोली में होती
मेरे और उसके कदमो के बीच
में इतनी दूरी ना होती
जब जब अपनी पलके उठाती
मुझे अपने सामने पाती
बस इतना सा ख्वाब ही तो वो
दिन भर अपनी आँखे में है सजाती
तो फिक्र क्यूँ औरों की करें
जब जिक्र हम तुम
आपस में कया करें
आओ बीती बातों को
हम रफा दफा करें

This post was last modified on September 9, 2017 10:14 am

" Alok Yadav : ."