अब हार पे मुस्कुराना भी आ जायेगा

14 Jun अब हार पे मुस्कुराना भी आ जायेगा

अब हार पे मुस्कुराना भी आ जायेगा
तेरे प्यार में रहे तो खिलखिलाना भी आ जायेगा
मुश्किलो से भला हम क्यु डरें
तेरा साथ मिला है जब से
आँखोंमें नए नए सपने से हैं भरे
आसान हो गया है अब जीना
वो वक़्त पीछे छूटा
जब रखना होता था होठों को सीना
अब गुनगुनाने में दिल बहल जाता है
तुम पास हो ना हो
जिक्र तुम्हार खुद ही से हो जाता है
तेरे आने की दस्तक सुनते ही
दिन कब कैसे
इंतज़ार में तुम्हारे
हाथों से फिसल सा जाता है
अब तो तुमसे मिलके ही
यह दिल सुकून को पाता है
कई दफा तनहा रातों में
तुम्हारी हसरत में
यह मन मचल भी जाता है
अब तो बहती हवाओं की धुन में भी
नाम तुम्हारा ही सुनने को
जी चाहता है