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और हमने तेरी खातिर

परिंदे आकाश में फिरते
कुछ इस धरती की
पनाह में बसते
सपने रातों के उजाले में हैं निकलते
अपनी एक अलग सी
दुनिया को वो हैं रचते
यहाँ हर किसी ने
अपने एक जहां बसा रखा है
और हमने तेरी खातिर
अपने सपनो को भी सुला रखा है

This post was last modified on September 9, 2017 10:14 am