और हमने तेरी खातिर

22 Jun और हमने तेरी खातिर

परिंदे आकाश में फिरते
कुछ इस धरती की
पनाह में बसते
सपने रातों के उजाले में हैं निकलते
अपनी एक अलग सी
दुनिया को वो हैं रचते
यहाँ हर किसी ने
अपने एक जहां बसा रखा है
और हमने तेरी खातिर
अपने सपनो को भी सुला रखा है