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चाहत में फिर रहे थे

एक हाथ में कागज़
एक में कलम
ओर दिल में सनम
मन में उठ रही थी तरंग
और सांसों में उमंग
अब दूर नहीं वो गगन
जिसको पाने की थी
सुबह शाम अगन
नज़रों में उनकी
देख रहे थे हम
वो प्यार जिसकी
चाहत में फिर रहे थे
बरसो से हम

This post was last modified on September 9, 2017 10:19 am

Alok Yadav :