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एक दूजे को आदाब

कुछ मुलाकातें ऐसी होती हैं
वो आते हैं
टकराते हैं
फिर गुमसुम से हो जाते हैं
खुद को रोक नहीं हैं पाते
उसी को ढूढ़ते है आते जाते
पलटते रहते है किताब
देखते हैं जागती आँखों से ख्वाब
हो जाते हैं एक दूजे से मिलने को बेताब
कुछ हैं जो प्यार में
कह रहे एक दूजे को आदाब

This post was last modified on September 9, 2017 10:12 am