एक दूजे में गुम

17 Jun एक दूजे में गुम

किसी दिन नदी के किनारे
हम होंगे बस तुम्हारे सहारे
कह रहे होंगे आरज़ू अपनी
बैठे बैठे तुम्हारे सिराहने
काजल को अपनी
बादलों पे उड़ेल दो
ज़रा बरखा की
कलाइयों को खोल दो
भीगेंगे फिर हम तुम
और हो जायेंगे
एक दूजे में गुम