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एक दूजे में गुम

किसी दिन नदी के किनारे
हम होंगे बस तुम्हारे सहारे
कह रहे होंगे आरज़ू अपनी
बैठे बैठे तुम्हारे सिराहने
काजल को अपनी
बादलों पे उड़ेल दो
ज़रा बरखा की
कलाइयों को खोल दो
भीगेंगे फिर हम तुम
और हो जायेंगे
एक दूजे में गुम

This post was last modified on September 9, 2017 10:16 am

Alok Yadav :