एक पैगाम है…….

13 Jun एक पैगाम है…….

बेहतरी को तेरी एक पैगाम है |
बरसों बाद तुम्हे देख हम हैरान हैं |
तुम वो  नहीं जो किसी के रोके रुकते ,
तेरी हस्ती तो कुछ और ही थी |
तुम वो नहीं जो चलते – चलते थकते ,
तेरी आँखों में नमी तो ना थी |
किस बात पे खुद ही से हुआ ख़फ़ा |
मिलने आये तुमसे हम कई दफ़ा |
हर पल सुखों के समन्दर नहीं होते |
छोटी -छोटी बातों पे ऐ दिल नहीं रोते |
ऐ जागती आँखों से सोने वाले |
सपने हक़ीक़त से रूबरू यूँहीं नहीं होते |