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ऐसी दूरी सह न पाएंगे

इंतज़ार की इंतज़ार
करते करते इन्तेहाूँ हो गयी
बाज़ार में खरीददारी
करते करते शाम हो गयी
घंटो राह में आँखे बिछाये थे बैठे
सोच रहे थे
आजकल चुप चुप क्यूँ हैं रहते
भला हमसे अपने दिल की बात
क्यूँ नहीं हैं कहते
वक़्त अब गुजरता नहीं
तू संग है पर
पहले सी मस्तियाँ क्यूँ नहीं
आँखे शरारती अब क्यूँ नहीं
मुझसे शिकायते भला क्यूँ नहीं
ऐसी दूरी सह न पाएंगे
मजाक में भी हम तुमसे
रूठ नहीं पाएंगे

This post was last modified on September 9, 2017 10:15 am

Alok Yadav :