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हिम्मत तुम्हारी ही थी

आज फिर पंख अपने संभल रहे हैं
उड़ने की चाहत है
उस आस्मां को निहार रहे हैं
मोहब्बत किस अदा का नाम है
जानना चाहते हो
एक ऐसी जिन्दगी में शामिल
होना चाहते हो
जहाँ रंग बिखरे पड़े हैं
बस प्यार में दिल उलझे पड़े हैं
फितरत नहीं मेरी की कुछ यूँही कह्दूं
किम्मत तुम्हारी ही थी
की सोचा एक दफा फिर से उड़ान भरलूँ

This post was last modified on September 9, 2017 10:18 am