इबादत करें

15 Aug इबादत करें

इबादत करें

शुकराना करे

आरज़ू करें

बस तुम्हारी

चाहत करें

शराफत करें

खिदमत में तुम्हारी

हम सिमट रहे हैं

आरजूओ में तुम्हारी

समझो जरा कुदरत के इशारे

हम हैं बस तुम्हारे सहारे

जन्नत मिली हैं मुझे

कभी बैठा था मैं सुनसान किनारे

कभी ना भूलेगे हम

ये एहसान तुम्हारे