कहानी अनसुनी सी

13 Jun कहानी अनसुनी सी

स्याही जब कागज़ को छूती है ,
कुछ तो कहती है ,
कागज़ को रंगीन करती , अपनी पहचान बनाती |
शायद कागज़ के कान में कुछ फुसफुसाती |
जैसे तेरे बबना क्या मेरी तकदीर है ?
कागज़ कहे मुझपे बनी ये जो तस्वीर है |
सभी के दिलों के करीब है |
तुम्ही से तो इस तस्वीर की तकदीर है |