कुछ कहना चाह रही थी

17 Jun कुछ कहना चाह रही थी

आज वो फिर नज़र आयी
धुंधलाती सी तस्वीर में
रंगों की रंगत ने
जैसे करामात दिखलाई
आज कुछ नया सा एहसास है
उसके हाथों में फिर मेरा हाथ है
लकीरों को खिंचने की चाहत लिए
वो खिलखिलायी
और वो हमारे करीब आयी
नदियों की धारा को लिए
वो बहती ही जा रही थी
धीरे धीरे आँखों में उसकी
शर्म सी छा रही थी
शायद
शायद वो
कुछ कहना चाह रही थी
आज वो हमें फिर से अपना
बना रही थी