क्यों तूने माँ की अस्ति गंगा में ना बहाई ?

13 Jun क्यों तूने माँ की अस्ति गंगा में ना बहाई ?

कहानी बड़ी अजीब सी लिखी नसीब की ,
जिस धरा की खाते थे रोटी |
उसी पे हुयी तेरी नीयत खोटी |
जिस माँ के हाथों में था चूरमा तेरे वास्ते|
उस माँ को मिली सुखी रोटी तेरे रास्ते |
उसके प्यार को भूल कोई बात नहीं |
उसकी हर इक बात को भूल कोई बात नहीं |
तुझे उसकी जरा भी याद न आई |
क्यों तूने माँ की अस्ति गंगा में ना बहाई ?