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महसूस हमने किया

सामने तुम्हारा हैं बैठे
कुछ दिल में है
पर यूँ ही कैसे कहते
तुम बेसब्री से इंतज़ार में डूबी हो
तुम हर पल मेरी बातों में गूंजी हो
जानकर हैरान हो रही
झूठ मूठ आँख मूँद सो रही
अपने ख्यालो में
कुछ अनसुलझे सवालों में
जबसे हमें शामिल है किया
नजदिकियाँ होती हैं कया
महसयस हमने किया

This post was last modified on September 9, 2017 10:14 am