मंजिल मिल चुकी थी

22 Jun मंजिल मिल चुकी थी

जाने अनजाने
किसी से गुफ्तगू कर ली
फिर बातों बातों में
दोस्ती कर ली
प्यार के रंग में डूबे जा रहे थे
कसमे -वादे निभाना चाह रहे थे
दोनों अपनी ही बस्ती में खुश थे
भीड़ में थे पर वो गुम थे
हर पल में उनके एक अजब सी
मस्ती घुल चुकी थी
शायद दोनों को अपनी अपनी
मंजिल मिल चुकी थी