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मंजिल मिल चुकी थी

जाने अनजाने
किसी से गुफ्तगू कर ली
फिर बातों बातों में
दोस्ती कर ली
प्यार के रंग में डूबे जा रहे थे
कसमे -वादे निभाना चाह रहे थे
दोनों अपनी ही बस्ती में खुश थे
भीड़ में थे पर वो गुम थे
हर पल में उनके एक अजब सी
मस्ती घुल चुकी थी
शायद दोनों को अपनी अपनी
मंजिल मिल चुकी थी

This post was last modified on September 9, 2017 10:14 am

Alok Yadav :