X

मैं सरहद भी लांघ गया था

तुझसे मिलने की खातिर
एक रोज़
मैं सरहद भी लांघ गया था
और कहती हो मैं तुमसे
दूर क्यूँ गया था
हँसते हँसते
तुम जिक्र जुदाई का कर रही थी
तुम्हे क्या पता
यहाूँ मेरी जान जल रही थी
मैं कहता नहीं
हाँ सहता भी नहीं
हर जशन में शामिल
तुम्हे करना चाहते हैं
शायद यही थी वजह
की हम तुमसे मिलना चाहते हैं

This post was last modified on September 9, 2017 10:11 am

Alok Yadav :