मैं सरहद भी लांघ गया था

25 Jun मैं सरहद भी लांघ गया था

तुझसे मिलने की खातिर
एक रोज़
मैं सरहद भी लांघ गया था
और कहती हो मैं तुमसे
दूर क्यूँ गया था
हँसते हँसते
तुम जिक्र जुदाई का कर रही थी
तुम्हे क्या पता
यहाूँ मेरी जान जल रही थी
मैं कहता नहीं
हाँ सहता भी नहीं
हर जशन में शामिल
तुम्हे करना चाहते हैं
शायद यही थी वजह
की हम तुमसे मिलना चाहते हैं