ना जाने तुम कहाँ गए

13 Jun ना जाने तुम कहाँ गए

हालातों के मद्देनज़र एक ख्याल आया |
किताबमें रखा बरसो पुराना गुलाब
जो नज़र आया |
दुनियादारी में हम क्या से क्या हो गए |
चाहते थे उन्हें और उन्ही से दूर हो गए |
अरमान फिर जाग रहे |
उन्हें अपने मान रहे |
वक्त से कदम मिलाते – मिलाते ,
तेरी आहतों को भुला गए I
होश जो आये तो पूछ रहे ,
ना जाने तुम कहाँ गए I