निर्मल बाबा की कृपा का नूर

13 Jun निर्मल बाबा की कृपा का नूर

यह वहाँ जहाँ भी जाऊंगा |
खुद को भूल नहीं पाउँगा |
कितना सच्चा कितना झूठा हूँ |
कहने से डरता हूँ |
जीवन की कसौटियो पर
खुद को परखना आसान नहीं |
यह जीवन  सिर्फ  सुबह शाम  नहीं |
मंजर बदल जाते हैं कुछ पाने की चाह में |
हीरे मिल जाते हैं कोयले की खदान में |
मिटटी में मिल जाता है गुरूर |
तभी होता है निर्मल बाबा की कृपा का नूर |