रहती हो हमारी धडकनों में

22 Jun रहती हो हमारी धडकनों में

शरारती हो अंदाज-ए-बयान
और पूछे वो रहते हो कहाँ
बेझिझक पर्दा शर्म का उठाओ
और कहदो ज़रा सूरत तो दिखलाओ
आइना हमारी आँखे बन जाएगी
जब भी तुम बन संवर
झूठ झूठ इतराओगी
जब बिच्देंगे हम तुम
कल कब मिलोगी
यह जरुर बतलाओगी
बेहिसाब बारिश के मौसम में
इन्रधनुष सी खिलखिलाओगी
कया मुझसे ये वािे निभाओगी
रहती हो हमारी धडकनों में
कल तुम सब को बतलाओगी