काश तुम मुझपे विश्वास कर सकती

21 Jul काश तुम मुझपे विश्वास कर सकती

काश दिल की बातें दिल में न रहती
काश मेरी ख्वाहिशे बन कागज की कश्ती
यूँ ही दरिया में न बहती
काश मेरे दर्द की कसक
सीने में तेरे न चुभती
काश मेरे आँखों की नमी
तेरी आँखों में न उतरती
काश की तुम उस पल को मेरे
आस-पास ही होती
काश मेरी शामें
यूँ तनहा तनहा सी न होती
काश की तुम हालातों को मेरे
यूँ दरकिनार न करती