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समझदारी ज़रा सी

जब भी कभी
किसी से जुड़ना
राह में तुम
भूल कर भी ना मुड़ना
माना कभी कभी
प्यार में हो जाता है भटकना
फिर शुरू होता है तड़पना
मन का उखड़ना
बैचेनियों का बढ़ना
दूर एक दूजे से वो रहके
परेशान हो रहे थे
अपनों के दर्द में वो
रो भी रहे थे
समझदारी ज़रा सी
जिसने इस रिश्ते में अपनायी
बड़ी खूबी से उन्होंने अपने
बीच की दूरियां मिटायी

This post was last modified on September 9, 2017 10:13 am