समझदारी ज़रा सी

22 Jun समझदारी ज़रा सी

जब भी कभी
किसी से जुड़ना
राह में तुम
भूल कर भी ना मुड़ना
माना कभी कभी
प्यार में हो जाता है भटकना
फिर शुरू होता है तड़पना
मन का उखड़ना
बैचेनियों का बढ़ना
दूर एक दूजे से वो रहके
परेशान हो रहे थे
अपनों के दर्द में वो
रो भी रहे थे
समझदारी ज़रा सी
जिसने इस रिश्ते में अपनायी
बड़ी खूबी से उन्होंने अपने
बीच की दूरियां मिटायी