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सपनों की दुनिया

सपनों की दुनिया

में हकीकत के फ़साने

बंद आँखों के सपने

होते हैं लुभावने

दुनिया क्या जाने

मेरे सपनों की कीमत

मेरी मोहब्बत ही है

मेरी ज़ीनत

क्या कह रहा हूँ

क्या सोचा रहा हूँ

हकीकत से

दो दो हाथ कर रहा हूँ

एक गैर की चाहत में

दिन रात एक कर रहा हूँ

उस खुदा की रहमत हो

बस यही इन्तजार कर रहा हूँ

बस कुछ करने की ख्वाहिश थी

पर अपनों की खातिर

आज उनके ख्वाबो को जी रहा हूँ

This post was last modified on August 12, 2017 7:50 am