तेरे चेहरे का नूर मेरी आखों में

15 Jun तेरे चेहरे का नूर मेरी आखों में

तेरे चेहरे का नूर मेरी आँखों में
इस कदर बस चुका है
की पूनम का चाँद जैसे
मेरे जीवन में सज रहा है
होश कब कैसे बेकाबू हो रहे
हम तुम्हारी अदाओं के
कायल हो रहे
जब भी हम तुम्हारे
ख्यालों में खो जाते हैं
वक़्त बेवक़्त तेरी यादों
की उलझनों में बिखर से जाते हैं