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उम्मीदों की बरखा

नज़दीकियाँ हमारी |
दूर कर रही ,
बैचेनियों को हमारी |
प्यार के संग -संग
उठ रही एक तरंग |
जैसे तू डोर मैं पतंग |
शीतल काया तेरी , मेरे मन को मोह रही |
उम्मीदों की बरखा में जैसे भीगो रही |

This post was last modified on September 9, 2017 10:25 am

Categories: Love Shayari
Alok Yadav :