वो इश्क ही क्या जहां तेरी रजा नहीं

13 Jun वो इश्क ही क्या जहां तेरी रजा नहीं

मोहतरमा , इश्क ह वो जुनून |
जो देता सुकून |
इश्क मखमली चादर |
जैसे मीठे पानी का सागर |
इश्क करन वाले के दिलों में
इश्क ही बसा करता है |
सामने से कोई जवाब आये न आये ,
उनकी बेहतरी की फ़रियाद किये  करता है |
इश्क कोई सज़ा नहीं |
बिन तेरे मज़ा नहीं |
वो इश्क ही क्या जहां तेरी रज़ा नहीं |