आदत है हमारी

26 Jun आदत है हमारी

आदत है हमारी
ठोकरे कितनी भी खाए
उतरनी नहीं खुमारी हमारी
चाहे हम टूट कर बिखरक्यूँ न जायें
पीठ पीछे हम न जाने
क्या क्या कहलाए
फिर भी धुल न झोंक पाएं
हर रास्ते हर मंजिल
हर आएने कि कसक
जाने कहाँ कहाँ
बिखरी पड़ी है
मेरे सपनो कि कि झलक
पर में न भूला था
न भूलूंगा
साँसेचल रही हैं
जब तलक